नई दिल्ली (ईएमएस)। आम लोगों में गंजेपन की समस्या लगातार बढती जा रही है। कम उम्र की लड़कियों और महिलाओं की सुंदरता और आत्मविश्वास के लिए बॉलों का झडना चिंता का विषय बन गया है। आलम यह है कि डॉक्टर के पास ऐसी महिलाओं और लड़कियों की भीड़ बढ़ने लगी है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनेरोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष इस बढ़ते गंजेपन के पीछे कई प्रमुख कारण बताते हैं। जानकारों का कहना है कि महिलाओं और लड़कियों में गंजेपन की सबसे बड़ी वजह हार्मोन्स का असंतुलित होना है, जिसे फीमेल पैटर्न बाल्डनेस के नाम से जाना जाता है। बीते दस सालों में ऐसे मामलों में लगातार इजाफा हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि लड़कियों को अब कम उम्र में ही पीरियड्स शुरू हो जाते हैं, अक्सर 8 से 12 साल की उम्र के बीच, या उनके पीरियड्स अनियमित रहते हैं। इस कारण शरीर में हार्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है, जिसका सीधा असर डीएचटी (डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन) नामक हार्मोन पर पड़ता है। डीएचटी का असर बालों की जड़ों पर पड़ता है, जिस वजह से बाल पतले हो जाते हैं या तेजी से झड़ने लगते हैं, जिससे सिर की त्वचा यानी स्कैल्प दिखने लगती है और खालीपन महसूस होता है। पुरुषों के हार्मोन (एंड्रोजन) का प्रभाव महिलाओं में बढ़ने पर बालों के फॉलिकल सिकुड़ने लगते हैं, जिससे बाल कमजोर होकर गिर जाते हैं। हार्मोनल असंतुलन के अलावा, महिलाओं में गंजेपन के कई अन्य कारण भी हैं, जैसे बढ़ती उम्र, जिसमें 30-40 साल के बाद यह समस्या अधिक स्पष्ट होने लगती है। इसके अतिरिक्त, कम उम्र में रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) का होना भी एक बड़ा कारण है, जो अब 45 साल की उम्र में भी देखा जाने लगा है। इस स्थिति में महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घटता है और एंड्रोजन का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे गंजापन आता है। इसके अलावा, थायरॉयड संबंधी समस्याएं, पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज), एनीमिया (खून की कमी), पोषण की कमी और अत्यधिक तनाव भी इस समस्या को बढ़ावा देते हैं और बालों के झड़ने का एक महत्वपूर्ण कारण बन जाते हैं। इस गंजेपन के कुछ विशिष्ट लक्षण होते हैं, जिन्हें पहचानना महत्वपूर्ण है। इनमें बालों की मांग का चौड़ा दिखना, सिर के बीच से स्कैल्प का नज़र आना, पोनीटेल का पतला होना, कंघी करते समय सामान्य से अधिक बालों का झड़ना और बालों का पतला व बेजान दिखना शामिल है। इन लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए और समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। इस स्थिति में सही इलाज करवाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। जानकारों का सुझाव है कि जब भी महिलाओं या लड़कियों में पीरियड्स अनियमित हों, तो इसे गंभीरता से लेते हुए सबसे पहले किसी एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। इन विशेषज्ञों से प्राथमिक उपचार करवाने के बाद, अगर आपके बाल, नाखून या त्वचा से जुड़ी कोई भी बीमारी हो, तो उसके लिए हमेशा एक पंजीकृत डर्मेटोलॉजिस्ट से ही मिलें। यही विशेषज्ञ सही निदान और प्रभावी इलाज प्रदान कर सकते हैं। सुदामा/ईएमएस 22 अप्रैल 2026