-परीक्षण करते हुए अमेरिका, चीन और इजराइल देशों के क्लब में शामिल हो जाएगा भारत नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत ने बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद से अपने अत्याधुनिक हथियारों की क्षमता में इजाफा किया है। इसी कड़ी में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एक परीक्षण करने की तैयारी में है। डीआरडीओ के इस मॉडर्न हथियार का नाम 100 किलोवाट लेजर वेपन है। इसे महत्वाकांक्षी दुर्गा प्रोग्राम के तहत विकसित किया जा रहा है। भारत ने यह परीक्षण कर लिया तो वह ऐसे देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास डायरेक्टेड एनर्जी वेपंस हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दुर्गा प्रोग्राम डीआरडीओ की महत्वाकांक्षी परियोजना है। सोशल मीडिया पर यह ट्रेंड कर रहा है। इसका मकसद ऐसा निर्देशित एनर्जी हथियार बनाना, जो- दुश्मन के ड्रोंस, मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को तबाह कर सके। इसका मकसद भारत की रक्षा जरूरतों को देखते हुए किफायती हथियार बनाना। परंपरागत हथियारों पर भारत की निर्भरता को घटाना। डीआरडीओ 100 किलोवाट लेजर हथियार हाई एनर्जी से भरपूर मारक होगा। ड्रोंस, मिसाइलों और विमानों को नष्ट करने में सक्षम होगा। प्रकाश की गति से यह दुश्मन के हथियारों को तबाह करेगा। मिसाइलों के मुकाबले यह हथियार ज्यादा किफायती होगा। फिलहाल हाई एनर्जी से लैस इस हथियार को भारतीय नौसेना के स्टील्थ युद्धपोतों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। भारतीय नौसेना की इस लेजर हथियार को अपने स्टील्थ जंगी बेड़े पर लगाने की योजना है। युद्धपोत में पहले से ही एडवांस रडार और मिसाइल सिस्टम भी होंगे। लेजर हथियार शामिल होने से युद्धपोत की मारक क्षमता और बढ़ जाएगी। लेजर हथियार के आने से दुश्मन के ड्रोन झुंडों को तुरंत नष्ट किया जा सकेगा। दुश्मन की ओर से आने वाली मिसाइलों का वास्तविक समय में मुकाबला हो पाएगा। गोला-बारूद का बोझ कम कर पारंपरिक युद्धक रणनीति पर निर्भरता घटाएगा। इससे नौसेना के जहाजों को मिसाइलों, तोपों और लेजरों को मिलाकर एक बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली मिलेगी। सिराज/ईएमएस 22 अप्रैल 2026