राष्ट्रीय
22-Apr-2026
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दौरे का उद्देश्य यूरोपीय संघ के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना नई दिल्ली,(ईएमएस)। पीएम नरेंद्र मोदी मई के मध्य में यूरोप की एक सप्ताह की यात्रा पर जाने वाले हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यूरोपीय संघ के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना और महाद्वीप के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी को नई दिशा देना है। इस यात्रा में पीएम मोदी कई विदेश दौरे करेंगे। वे नॉर्वे, नीदरलैंड और इटली भी जाएंगे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी की यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव नॉर्वे की राजधानी ओस्लो होगा, जहां वे तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस सम्मेलन में स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता भी शामिल होंगे। इससे पहले यह सम्मेलन 2018 में स्टॉकहोम और 2022 में कोपेनहेगन में हो चुका है। नॉर्वे यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ का एक अहम सदस्य है। अक्टूबर 2025 में लागू हुए भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते के बाद इस दौरे की अहमियत काफी बढ़ गई है। इस समझौते के तहत ईएफटीए देशों ने अगले 15 सालों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया है, जिससे देश में करीब 10 लाख नए रोजगार पैदा होंगे। साथ ही इससे कपड़ा, चमड़ा और खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार खुलेंगे। ओस्लो में होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं में हरित ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, ब्लू इकॉनमी, इनोवेशन, डिजिटलीकरण और आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग पर विस्तार से चर्चा होगी। ओस्लो के बाद पीएम मोदी नीदरलैंड जाएंगे। यहां उनकी पिछली यात्रा 2017 में हुई थी। द हेग जल प्रबंधन, कृषि, तकनीक और आतंकवाद विरोधी प्रयासों में भारत का एक प्रमुख भागीदार रहा है। पिछले साल कुछ कारणों से टल गए कार्यक्रमों और बैठकों की तारीखों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया जा सके। पीएम मोदी के कार्यक्रम में इटली भी शामिल है। यह उनकी इटली की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। हालांकि वे 2021 में जी20 शिखर सम्मेलन और 2024 में जी7 आउटरीच के लिए रोम जा चुके हैं। इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के साथ उनकी चर्चा का मुख्य केंद्र रक्षा, ऊर्जा और निवेश से जुड़े मुद्दे होंगे। इस बात की भी संभावना है कि पीएम मोदी वेटिकन सिटी का दौरा करें और ईसाई धर्मगुरु पोप से मुलाकात कर सकते हैं। इस दौरे से एफटीए को तेजी से लागू करने, सप्लाई चेन को विविधतापूर्ण बनाने और स्वच्छ तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी। यूरोप के साथ इस सघन कूटनीति के क्रम में, पीएम मोदी जून के महीने में फ्रांस भी जाएंगे, जहां वे जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत को 2019 से लगातार इस प्रभावशाली समूह के आउटरीच कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता रहा है, जो वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते कद को दर्शाता है। सिराज/ईएमएस 22अप्रैल26