वॉशिंगटन,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में हफ्तों से जारी संघर्ष के बीच जहाँ एक ओर शांति बहाली के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका की एक गुप्त और आक्रामक सैन्य रणनीति ने दुनिया को चौंका दिया है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने एक विशेष ‘हिट लिस्ट’ तैयार की है। जिसमें सबसे ऊपर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर- इन-चीफ जनरल अहमद वाहिदी का नाम शामिल है। अमेरिकी रक्षा विभाग का मानना है कि वाहिदी वह प्रमुख व्यक्ति हैं जो अपनी कट्टरपंथी विचारधारा के कारण शांति वार्ता की राह में सबसे बड़ा अवरोध बने हुए हैं। वाशिंगटन की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि यदि वर्तमान दौर की पीस टॉक विफल रहती है, तो अमेरिका अपने ‘प्लान-बी’ के तहत सीधे सैन्य कार्रवाई कर सकता है। जनरल अहमद वाहिदी को 1 मार्च, 2026 को आईआरजीसी की कमान सौंपी गई थी, जब उनके पूर्ववर्ती मोहम्मद पाकपुर एक हमले में मारे गए थे। वाहिदी को ईरान के भीतर कट्टरपंथियों का भी ‘गुरु’ माना जाता है। वे 1988 से 1997 तक कुद्स फोर्स के प्रमुख रह चुके हैं और उनका प्रभाव ईरान की विदेश नीति पर इस कदर हावी है कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी उनकी सहमति के बिना कोई बड़ा फैसला नहीं ले पाते। इसका उदाहरण हाल ही में तब देखने को मिला जब अराघची ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की बात कही, लेकिन वाहिदी ने 24 घंटे के भीतर उस फैसले को पलटते हुए रास्ता फिर से बंद करवा दिया। वाहिदी का इतिहास विवादों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से भरा रहा है। वे 1994 के अर्जेंटीना यहूदी सेंटर बम धमाके के मामले में 2007 से इंटरपोल की वॉन्टेड लिस्ट में हैं और अमेरिका ने 2010 में ही उनके परमाणु व मिसाइल कार्यक्रमों के कारण उन पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। पेंटागन के अधिकारियों का कहना है कि यदि कूटनीति विफल होती है, तो अमेरिका केवल वाहिदी को ही निशाना नहीं बनाएगा, बल्कि ईरान की पूरी सैन्य और आर्थिक क्षमता को कुचलने की तैयारी कर रहा है। इस रणनीति के तहत अमेरिका होर्मुज की घेराबंदी तोड़ने के लिए ईरानी हमलावर नावों और माइन्स बिछाने वाले जहाजों को नष्ट करने के साथ-साथ ईरान के तेल और गैस ठिकानों पर बड़े हमले कर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी तंज कसते हुए कहा है कि ईरानी शासन इस वक्त पूरी तरह भ्रमित है और उन्हें खुद नहीं पता कि उनका असली नेता कौन है। अमेरिका का यह कड़ा रुख स्पष्ट करता है कि वह शांति के लिए बातचीत तो कर रहा है, लेकिन उसने युद्ध की स्थिति के लिए अपनी सबसे घातक योजनाएं भी तैयार कर ली हैं। वीरेंद्र/ईएमएस 26 अप्रैल 2026