हनोई (ईएमएस)। वियतनाम के रक्षा मंत्रालय ने 2030 के दशक की शुरुआत में रूसी एसयू-57 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक संभावना है कि इन विमानों का उपयोग उसकी अग्रिम पंक्ति में तैनात 12 एसयू-27 और 30 एसयू-22 चौथी पीढ़ी लड़ाकू विमानों को बदलने में किया जाएगा। सबसे पहले 2017 के मध्य में वियतनामी मीडिया में खबरें सामने आई थीं कि मंत्रालय 2030 के आसपास से 12-24 एसयू-57 विमानों को खरीदने की योजना बना रहा है। इसके बाद जनवरी 2019 की शुरुआत में भी इस बारे में खबरें सामने आईं। वियतनाम के पास आज लड़ाकू विमानों का जो बेड़ा है वह पूरी तरह से रूसी विमानों से बना है। इसी तरह उसकी थल सेना, नौसेना और वायु रक्षा नेटवर्क भी आपूर्तिकर्ता के रूप में रूस पर ही अत्यधिक निर्भर हैं। एसयू-57 को वियतनाम के अपने हवाई बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए अब तक का सबसे संभावित विकल्प माना जाता है। इस विमान की खास तौर पर लंबी रेंज देश के ठिकानों से दक्षिण चीन सागर के विवादित जलक्षेत्रों में गश्त करने में सक्षम बनाती है। एसयू-57 की लंबी रेंज और शक्तिशाली सेंसर चौथी और पांचवीं पीढ़ी के खतरों के खिलाफ बड़े क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सबसे उपयुक्त हैं। साथ ही यह वियतनाम की जमीन-आधारित एयर डिफेंस सिस्टम, दूसरे जहाजों और अन्य विमानों के साथ पूरी तरह से तालमेल बिठा सकता है और डेटा लिंक के जरिए जानकारी साझा कर सकता है। अप्रैल के मध्य में रूसी रक्षा निर्यात समूह रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने इसकी की पुष्टि की है कि कई देशों ने पहले ही इस विमान के लिए अपने ऑर्डर दे दिए हैं। ईरान, भारत और उत्तर कोरिया के साथ-साथ वियतनाम को भी विमान के सबसे संभावित ग्राहकों में से एक माना जा रहा है। एसयू-57 लड़ाकू विमान के साथ सबसे खास बात ये है कि इसकी कीमत काफी कम है और इसका मेटिनेंस खर्च भी काफी है। इसीलिए वियतनाम के लिए ये एक बेहतरीन सौदा माना जा रहा है। दिल्ली में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने भारत को एसयू 57 लड़ाकू विमान सौदे पर नया प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा एसयू-57 एक ऐसा विषय है जिस पर हम चर्चा करते हैं। भारत ने न सार्वजनिक किया है और न ही एसयू-57 विमान को लेकर कोई फैसला लिया है। लेकिन हमें उम्मीद है कि इस विशेष प्लेटफॉर्म पर हमारा सहयोग होगा क्योंकि यह दुनिया के सबसे एडवांस विमानों में से एक रहा है। आशीष/ईएमएस 26 अप्रैल 2026