शनिवार 25 अप्रैल 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी में हिल्टन होटल में आयोजित रात्रिभोज कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति द्वारा की गई गोलीबारी वास्तव में बहुत चिंता का विषय है।कितनी बड़ी बात है कि हमलावर की पहचान कैलिफोर्निया निवासी कोल टॉमस एलन (31) के रूप में हुई है और वह पेशे से शिक्षक है तथा मैकेनिकल इंजीनियरिंग व कंप्यूटर साइंस का छात्र होने के साथ ही नासा से जुड़ा हुआ भी रह चुका है। हमलावर के पास एक शॉटगन, एक हैंडगन और कई चाकू थे। वह हिल्टन होटल में पहले से रुका हुआ था।एक शिक्षक द्वारा गोलीबारी सबको विस्मित करता है। यहां सबसे बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि वास्तव में यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधे हमले का इरादा था या विरोध जताने की आपराधिक कोशिश ? जानकारी के अनुसार हमलावर ने 5-7 गोलियां चलाईं थीं और इसमें एक सुरक्षाकर्मी भी घायल हुआ है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिस वक्त गोलियां चलीं, उस समय वहां अमेरिकी राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, रक्षा और विदेश मंत्री सहित अनेक संवाददाता भी मौजूद थे। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर हमलावर की तस्वीरें खुद जारी की हैं। उन्होंने बताया है कि संदिग्ध कैलिफोर्निया का रहने वाला है और घटना के समय उसके पास कई हथियार थे। हमलावर के पास अनेक हथियारों का होना तो और भी चिंता की बात है। वास्तव में किसी भी लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं होता है और यह हमला बहुत ही निंदनीय और अफसोसजनक है।इस गोलीबारी की घटना से कहीं न कहीं अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था की साख पर भी सवाल खड़े होते हैं, क्यों कि दुनिया के सबसे पावरफुल कहे जाने वाले देश के सबसे वीवीआईपी लोगों के रात्रिकालीन भोज में एक बंदूकधारी आखिर कैसे प्रवेश कर गया ? वास्तव में यह अमेरिकी सुरक्षा व जांच एजेंसियों के लिए गहन जांच का विषय होगा कि इस हमले के पीछे केवल वैचारिक विरोध है, कोई जेहादी मानसिकता या किसी दुश्मन देश की साजिश या ड्रग माफिया की कारस्तानी ? पाठक जानते होंगे कि अमेरिका में सुरक्षा व्यवस्था दुनिया की सबसे मजबूत और बहुस्तरीय प्रणालियों में से एक है। उल्लेखनीय है कि सीक्रेट सर्विस एजेंट्स राष्ट्रपति के साथ-साथ उनके परिवार, उपराष्ट्रपति और हाई-प्रोफाइल नेताओं की सुरक्षा करते हैं और यह सुरक्षा देश और विदेश दोनों जगह रहती है। इतना ही नहीं,सीआइए और एफबीआई के साथ-साथ एनएसए भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए काम करती हैं, जिसे सबसे बड़ा गुप्तचर संगठन माना जाता है। अमेरिका जैसे लोकतांत्रिक देश में राष्ट्रपति और अन्य वीआईपी के लिए बेहद कड़े सुरक्षा इंतजाम मौजूद हैं, बावजूद इसके ऐसी कोताही बहुत ही गंभीर व संवेदनशील है। हाल फिलहाल, यहां यह बात भी गौर करने की है कि ईरान पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रक्षा और खुफिया कार्यों में लगे अनेक अधिकारियों को पद से हटाया है। अतः यहां यक्ष प्रश्न यह भी उठता है कि क्या उनकी नई रक्षा टीम पर्याप्त सशक्त, सक्रिय और सचेत नहीं है? लेकिन इस हमले के बाद इतना तो तय है कि सुरक्षा व्यवस्था अब और अधिक बेहतर तथा चाक-चौबंद कर दी जाएगी।हालांकि, यह कोई पहली घटना नहीं है कि ट्रंप पर हमला हुआ हो। यह तीसरी बार है डोनल्ड ट्रंप को निशाना बनाया गया हो। पाठकों को बताता चलूं कि मार्च 2016 लास वेगस में राष्ट्रपति चुनाव प्रचार को दौरान एक रैली में सुरक्षा में बड़ी चूक के कारण एक व्यक्ति ने मंच के पास पहुंचकर ट्रंप की ओर से पुलिस अधिकारी का हथियार छीनने की कोशिश की थी। हालांकि , सुरक्षा अधिकारियों ने तुरंत उसे गिरफ्तार कर लिया था और पूछताछ में उसने ट्रंप को नुकसान पहुंचाने की मंशा को स्वीकार किया। इसी प्रकार से जुलाई 2024 पेन्सिलवेनिया में ट्रंप पर चुनावी करियर का सबसे खतरनाक हमला हुआ था। इस हमले में हमलावर ने रैली के दौरान छत से ट्रंप को निशाना बनाकर गोली चलाई।उस समय गोली ट्रंप के दाहिने कान के ऊपरी हिस्सो को छूकर निकल गई थी। इस हमले में एक दर्शक की मौत हुई और कई घायल हुए। हालांकि,सुरक्षाबलों ने हमलावर को मौके पर ही मार गिराया था। बहरहाल, यहां यह कहना ग़लत नहीं होगा कि पिछले कुछ समय से दुनियाभर में ट्रंप की नीतियों के आलोचकों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। पिछले कुछ समय से ट्रंप के कुछ समर्थक भी उनका विरोध या असंतोष जताने लगे हैं। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति को यह चाहिए कि वे अपनी रणनीतियों के साथ ही साथ देश-विदेशों में अपने प्रति लगातार बढ़ रही नाराजगी, असंतोष, विरोध आदि के बारे में पूरी ईमानदारी से विचार करें। डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान, अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों से पूरी दुनिया में समस्याएं कहीं न कहीं बढ़ीं ही हैं। पूरी दुनिया में गैस-तेल संकट, खाद्यान्न संकट, पर्यावरणीय समस्याओं के साथ ही साथ, महंगाई व आर्थिक संकट बढ़े हैं और दुनिया ट्रंप के फैसलों और रणनीतियों से खुश नहीं है।सच तो यह है कि एक तरफ तो वे शांति के नोबेल की बात करते हैं और दूसरी तरफ युद्ध की। ईरान की सभ्यता मिटाने तक की बात उन्होंने कही, इससे समस्याओं का समाधान नहीं बल्कि, समस्याओं की बढ़ोत्तरी को जन्म हुआ है।सच तो यह है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ग़लत रणनीतियों तथा उनके गलत कदमों का खमियाजा आज दुनिया के ज्यादातर देश भुगत रहे हैं। यह बात ठीक है कि सुरक्षा एक बड़ा व व्यापक विषय है,इसे संवेदनशीलता व गंभीरता से लिया जाना बहुत ही महत्वपूर्ण और अहम् है। हाल फिलहाल, कहना ग़लत नहीं होगा कि अमेरिका अगर यह चाहता है कि उसकी समस्या को दुनिया अपनी भी समस्या माने, तो उसे भी यह साबित करना होगा कि वह दुनिया की समस्या को अपनी मानता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को यह समझना चाहिए कि युद्ध किसी भी समस्या का कभी भी स्थायी हल नहीं होता है। युद्ध से कोई भी देश बरसों पीछे की स्थिति में पहुंच जाता है और प्रहार मानवता पर ही होता है। दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र से पूरी दुनिया यह अपेक्षा करती है कि युद्ध हर हाल में समाप्त हो तथा संवाद की मेज को तवज्जो दी जाए और मानवता की रक्षा की जाए। भलाई इसी में है। वास्तव में, शान्ति, संयम और सौहार्द से सभी समस्याओं का समाधान संभव हो सकता है। (सुनील कुमार महला, फ्रीलांस राइटर, कॉलमिस्ट व युवा साहित्यकार, पिथौरागढ़, उत्तराखंड।) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) ईएमएस / 28 अप्रैल 26