30-Apr-2026
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तेहरान (ईएमएस)। ईरान की शक्तिशाली सेना इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अमेरिका के खिलाफ अपने तेवर कड़े करते हुए सीधे सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। आईआरजीसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका ने क्षेत्र में कोई भी नया सैन्य कदम उठाया, तो ईरानी नौसेना अमेरिकी जहाजों को समुद्र में नष्ट करने से पीछे नहीं हटेगी। ईरान की ओर से यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर वह पूरे क्षेत्र में फैले अपने सहयोगी नेटवर्क को सक्रिय कर सकता है, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक बड़ा संकट पैदा हो सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब खाड़ी क्षेत्र में सैन्य और कूटनीतिक तनाव अपने चरम पर है और दोनों देश एक-दूसरे की क्षमताओं को चुनौती दे रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि ईरान वर्तमान में बेहद कमजोर स्थिति में है। ट्रंप का दावा है कि ईरानी नेतृत्व के भीतर आपसी फूट पड़ी हुई है और देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। अमेरिका ने ईरान द्वारा दिए गए हालिया शांति प्रस्ताव पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि जब तक परमाणु मुद्दे का पूर्ण समाधान नहीं हो जाता, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान आर्थिक दबाव के कारण जल्द से जल्द स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना चाहता है, क्योंकि उसका तेल निर्यात और राजस्व बुरी तरह प्रभावित हुआ है।ईरान ने बातचीत के लिए जो प्रस्ताव रखा है, उसमें उसने पहले युद्धविराम लागू करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की बात कही है, जबकि परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल परीक्षण और आर्थिक प्रतिबंधों जैसे जटिल मुद्दों को बाद की चर्चा के लिए छोड़ने का सुझाव दिया है। हालांकि, अमेरिका की प्राथमिकता परमाणु मुद्दा है, जिसके कारण कूटनीतिक गतिरोध बना हुआ है। इस बीच, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के लिए रूस और पाकिस्तान जैसे देशों से संपर्क साधा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने हाल ही में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी सहयोग पर चर्चा की है। क्षेत्रीय स्तर पर, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने सऊदी अरब में बैठक कर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की ईरानी धमकी का कड़ा विरोध किया है और समुद्री रास्तों में मुक्त आवाजाही की मांग की है। अमेरिका अब ईरान पर लंबे समय तक आर्थिक दबाव बनाने और उसके तेल निर्यात के समुद्री रास्तों को और अधिक सीमित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि भारी दबाव के बावजूद ईरान झुकने के बजाय अपने सैन्य रुख को और आक्रामक बना रहा है, जिससे इस संघर्ष के जल्द खत्म होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस 30 अप्रैल 2026