राष्ट्रीय
30-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत की वायु सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए रूस से चौथा एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम मई के मध्य तक देश पहुंचने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायुसेना द्वारा इस महीने प्री-डिस्पैच निरीक्षण पूरा किए जाने के बाद रवाना किया गया है। वहीं मूल समझौते के तहत पांचवीं और अंतिम एस-400 रेजिमेंट नवंबर तक मिलने की उम्मीद है। चौथे एस-400 सिस्टम की डिलीवरी तब हो रही है, जब ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ नजदीक है। इस अभियान के दौरान एस-400 ने पाकिस्तान की हवाई चुनौतियों का मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारत और रूस के बीच अक्टूबर 2018 में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की लागत से पांच एस-400 रेजिमेंट खरीदने का समझौता हुआ था। अब तक तीन सिस्टम भारत को मिल चुके हैं और उन्हें भारतीय वायुसेना में शामिल किया जा चुका है। चौथी यूनिट की डिलीवरी रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने से तीन साल से अधिक देरी से हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, चौथे सिस्टम को राजस्थान सेक्टर में तैनात किया जा सकता है, जिससे पाकिस्तान सीमा पर हवाई सुरक्षा और मजबूत होगी। इस बीच मार्च में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने रूस से पांच अतिरिक्त एस-400 सिस्टम खरीदने को मंजूरी दी है। इससे भारत के पास कुल 10 एस-400 रेजिमेंट हो जाएंगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सभी एस-400 यूनिट्स और स्वदेशी प्रोजेक्ट कुशा मिसाइल प्रणाली के संचालन में आने के बाद भारत की वायु सीमा ड्रोन, आधुनिक लड़ाकू विमानों और बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ बेहद मजबूत हो जाएगी। ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 ने अहम भूमिका निभाई यह बताना ज़रूरी है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 मिसाइल सिस्टम ने बेहद अहम भूमिका निभाई थी। 7 से 10 मई के बीच पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य संघर्ष के दौरान भारतीय वायु सेना ने एस-400 ट्रायम्फ का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था, जिससे इसकी रणनीतिक और ऑपरेशनल अहमियत साबित हुई। आशीष/ईएमएस 30 अप्रैल 2026