भारतीय जनता पार्टी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद का विशेष सत्र बुलाया। यह सत्र ऐसे समय बुलाया गया, जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव चल रहे थे। मतदान 23 एवं 29 अप्रैल को होना था। कुछ दिन पहले ही संसद का सत्र स्थगित हुआ था। यदि यह बिल इतना जरूरी था, तो ऐसी स्थिति में जब संसद चल रही थी उसी समय यह बिल लाया जा सकता था। सरकार ने विशेष सत्र क्यों बुलाया, इसको लेकर भाजपा की रणनीति को समझना जरूरी है। महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हो चुका है। इसमें 33 फीसदी महिलाओं को आरक्षण दिया जा चुका है। इसको लागू किस तरह से किया जाए, इसको लेकर दो महत्वपूर्ण विषयों पर सत्ता पक्ष राजनीति कर रही है। 2023 में जब महिला आरक्षण बिल सर्वसम्ममिति से पास हुआ था, उस समय विपक्ष की मांग थी, इसे तुरंत लागू किया जाए। 2024 का लोकसभा चुनाव 33 फीसद महिला आरक्षण के साथ हो। उस समय सत्ता पक्ष ने विपक्ष की मांग को स्वीकार नहीं किया। सरकार ने बिल में प्रावधान किया, 2026 की जनगणना के बाद परिसीमन किया जाएगा। उसके बाद ही महिला आरक्षण संसद और विधानसभा में लागू किया जाएगा। महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव हुए। भाजपा को उम्मीद थी, महिला आरक्षण को लेकर वह 2024 के लोकसभा चुनाव को 400 से ज्यादा सीट पर चुनाव जीतेंगे। हुआ इसका उल्टा, भाजपा को मात्र 240 सीटों पर सीमित हो जाना पड़ा। भाजपा को पूर्ण बहुमत भी नहीं मिला। इसके बाद भाजपा ने रणनीति बदली, विपक्ष जिस तरह से सशक्त हो रहा था, उसको देखते हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने विशेष सत्र बुलाकर, यह सोचा था, महिला आरक्षण बिल के नाम पर जनगणना और परिसीमन को लेकर दो नए संशोधन करेंगे। इसके माध्यम से विधानसभा तथा 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए महिलाओं के आरक्षण को शीर्ष पर रखा जाएगा। सरकार को भरोसा था पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की सांसदों की संख्या अधिक है, चुनाव के कारण वह सत्र में भाग नहीं लेंगे। उपस्थित सदस्य संख्या के दो तिहाई बहुमत से सदन के अंदर सरकार संशोधन बिल पास करा लेगी। यदि बिल पास नहीं हो पाया, तो भी महिला आरक्षण बिल को मुद्दा बनाकर भाजपा तमिलनाडु और बंगाल के विधानसभा में बढ़त बना लेगा। वहीं लोकसभा चुनाव में महिलाओं के मुद्दे पर विपक्ष को घेरेगा। संसद में दो तिहाई बहुमत से बिल पास नहीं हुआ। उसके बाद भाजपा ने इस रणनीति के तहत तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में महिला आरक्षण को मुद्दा चुनाव में बनाया। अब सभी राज्यों में प्रदर्शन और विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण बिल के बारे में संकल्प पारित कराए जा रहे हैं। भाजपा एक सुनियोजित रणनीति बनाकर लंबी अवधि की राजनीति करती है। भाजपा का धार्मिक ध्रुवीकरण का मुद्दा कमजोर पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में 50 फीसदी से अधिक महिला आबादी को आरक्षण के नाम पर भाजपा राजनीति करना चाहती है। केंद्र में भाजपा की सरकार है। इससे अच्छा मौका और कोई नहीं हो सकता है। महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं बनाकर और महिलाओं के पक्ष में भाजपा है, यह धारणा बनाकर भाजपा 2029 के लोकसभा चुनाव में 400 से अधिक सीटें प्राप्त करने की रणनीति पर काम कर रही है। जिस तरह से भाजपा के महिला आरक्षण को लेकर आक्रामक तेवर हैं, सभी राज्यों में प्रदर्शन किए जा रहे हैं। विधानसभा में जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां पर महिला आरक्षण के संकल्प पारित कराए जा रहे हैं। महिलाओं के मुद्दे को भाजपा 2029 के लोकसभा चुनाव तक विवादों में रखना चाहती है। भाजपा के रणनीतिकारों का विश्वास है, कि इस मुद्दे पर विपक्ष को दबाव में लाकर, 2026 की जनगणना में जाति जनगणना से बचा जाए। अभी केंद्र सरकार ने जाति जनगणना होगी या नहीं इसको लेकर अभी तक कोई नियम निर्धारित नहीं किए हैं। 2011 और 2026 की जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने विवाद की स्थिति बना दी है। परिसीमन सरकार अपने हिसाब से कराना चाहती है, इसमें संविधान के अभी जो प्रावधान हैं, दक्षिण के राज्यों को डराकर, केंद्र सरकार 850 लोकसभा सीटों की संख्या पर सहमत कराना चाहती है। महिला आरक्षण के नाम पर भाजपा, दक्षिण के राज्यों में सेंध लगाने की रणनीति पर पूरे आत्मविश्वास के साथ काम कर रही है। भाजपा और संघ का शीर्ष नेतृत्व महिला आरक्षण पर दबाव बना रही है। इस मुद्दे पर विपक्ष के कई राजनीतिक दल टूटकर भाजपा के साथ आ सकते है। दक्षिण के राज्यों को परिसीमन में कोई नुकसान नहीं होगा, इसके लिए भाजपा 850 सीटों का झुनझुना बजाकर दक्षिण के राज्यों के अपने पाले पर लाना चाहता है। भाजपा दक्षिण के राज्यों को भरोसा देना चाहती है, उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। जो अनुपात अभी है, वही आगे भी बना रहेगा। परिसीमन भय दिखाकर राजनीतिक दलों को तोड़ने के लिए महिला आरक्षण के साथ साम-दाम-दंड-भेद की रणनीति पर परिसिमन बिल को सरकार संसद में पास कराने की योजना पर काम कर रही है। इसमें सफल होगी या नहीं, कहना मुश्किल है। संघ और भाजपा के रणनीतिकार 2029 का लोकसभा चुनाव 2011 की जनगणना तथा परिसीमन के नये नियमों के अनुसार लोकसभा सीटों के निर्धारण की राजनीति करा रहे हैं। इससे सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के बीच टकराव तेज होगा। यह दोनों के अस्तित्व की लड़ाई है। ईएमएस / 30 अप्रैल 29