बिलासपुर (ईएमएस)। भीषण गर्मी, धूलभरी आंधियों और तपते राजनीतिक माहौल के बीच बिलासपुर में एक महीने तक चला ‘बस्ती चलो अभियान’ अब सियासी चर्चा के केंद्र में है। नगर विधायक अमर अग्रवाल ने इसे महज जनसंपर्क नहीं, बल्कि जमीनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति के रूप में पेश किया—जहां हर वार्ड, हर बस्ती और हर वर्ग तक पहुंचने की कोशिश दिखाई दी। शहर की सियासत में पिछले एक महीने से लगातार सक्रिय रहे ‘बस्ती चलो अभियान’ का समापन होते ही इसके राजनीतिक मायने भी सामने आने लगे हैं। नगर के छहों मंडलों—उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम, मध्य और रेलवे—में फैले इस अभियान के जरिए विधायक अमर अग्रवाल ने सीधे जनता तक पहुंच बनाकर अपने जनाधार को पुनस्र्थापित करने का प्रयास किया। अभियान का अंतिम चरण तिलक नगर से शुरू होकर जबड़ा पारा होते हुए विद्या नगर में समाप्त हुआ, लेकिन इसके पीछे का संदेश सिर्फ समापन तक सीमित नहीं दिखा। पूरे कार्यक्रम के दौरान जिस तरह से भीषण गर्मी में पदयात्रा और घर-घर संपर्क किया गया, उसे राजनीतिक रूप से ‘ग्राउंड एक्टिवेशन’ के तौर पर देखा जा रहा है। अप्रैल की तपती दोपहर, जब आम जनजीवन थमता नजर आता है, उस वक्त अभियान का जारी रहना अपने आप में एक राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इसे ‘एक्टिव लीडरशिप’ के प्रदर्शन के तौर पर प्रचारित किया गया। सियासी गलियारों में चर्चा है कि यह अभियान आगामी चुनावी रणनीति का शुरुआती खाका भी हो सकता है, जहां व्यक्तिगत संपर्क को प्राथमिकता दी गई। सूत्रों के मुताबिक, अभियान के दौरान हर मंडल में स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी गई। कहीं पानी, कहीं सडक़, तो कहीं सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं पर चर्चा हुई। जनप्रतिनिधि द्वारा मौके पर अधिकारियों को निर्देश देना भी इस अभियान का हिस्सा रहा, जिससे ‘तत्काल समाधान’ की छवि को मजबूत करने की कोशिश नजर आई। अभियान के दौरान कई जगहों पर पारंपरिक स्वागत—आरती, पुष्पवर्षा और आशीर्वाद—देखने को मिला। महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इसे जनसमर्थन के साथ-साथ ‘मोबिलाइजेशन’ का हिस्सा भी मान रहे हैं, जहां कार्यकर्ता नेटवर्क को सक्रिय करने का प्रयास हुआ। अभियान में ‘मोदी गारंटी’ और राज्य सरकार के ‘सुशासन’ को बार-बार प्रमुखता दी गई। इससे यह संकेत भी गया कि स्थानीय नेतृत्व, संगठन और सरकार की योजनाओं को एक साथ जोडकऱ प्रस्तुत किया जा रहा है। यह रणनीति मतदाताओं के बीच भरोसा और निरंतरता का संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। लगातार एक महीने तक चलने वाला यह अभियान अब शहर की राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। जहां समर्थक इसे जनसेवा और प्रतिबद्धता का उदाहरण बता रहे हैं, वहीं विपक्षी हलकों में इसे चुनावी तैयारी का हिस्सा बताया जा रहा है। - 30 अप्रैल 2026