- नीलगाय-भेड़की का मांस और राइफल जब्त गुना (ईएमएस) । जिले की वन परिक्षेत्र बीनागंज के अंतर्गत वन विभाग की टीम ने बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात करीबन 3:30 बजे एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भोपाल से आए पाँच अंतर्राज्यीय शिकारियों को रंगे हाथों दबोचा है। शिकारियों के कब्जे से एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी, अत्याधुनिक राइफल, जिंदा कारतूस और भारी मात्रा में वन्य जीवों का मांस बरामद किया गया है। मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी जानकारी के अनुसार, बीनागंज वन परिक्षेत्र के चौपचा वन क्षेत्र में पिछले कुछ समय से अवैध शिकार की गतिविधियाँ सामने आ रही थीं। वन परिक्षेत्राधिकारी सौरभ द्विवेदी को मुखबिर से सूचना मिली कि एक सफेद स्कॉर्पियो एमपी 09 सीए 8530 में कुछ संदिग्ध व्यक्ति हथियारों के साथ जंगल में घूम रहे हैं। सूचना मिलते ही परिक्षेत्राधिकारी ने तत्काल कुम्भराज और बीनागंज के वन अमले को सक्रिय कर ग्राम चौपना के पास नाकाबंदी की गाड़ी की तलाशी में मिला मौत का सामान तडक़े करीब 3:30 बजे संदिग्ध वाहन को रोककर जब तलाशी ली गई, तो वन विभाग की टीम दंग रह गई। वाहन के अंदर से एक दूरबीन लगी हुई 30.06 बोर की राइफल, 07 जिंदा कारतूस, 02 खाली खोखे, छुरियां और कुल्हाड़ी बरामद हुई। इसके साथ ही शिकार किए गए हिरण, नीलगाय सहित वन्य जीवों का मांस एवं कटे हुए अंग भी मिले।, जिसमें नीलगाय का कटा हुआ हिस्सा और दो टुकड़ों में बंटी हुई भेडक़ी जो हिरण की प्रजाति की होती है, शामिल थी। पुलिस ने मौके से मांस काटने के औजार और कलेजी भी जब्त की है। भोपाल के रहने वाले हैं आरोपी पकड़े गए आरोपियों की पहचान मोइल अली पिता तैयब अली, तनवीर पिता अब्दुल जब्बार, फरहत खान पिता चांद मिया, मोहसिन पिता अब्दुल हकीम एवं सागर सिंह पिता नन्नू राजपूत शामिल हैं। जो सभी भोपाल के निवासी बताए जा रहे हैं। वन विभाग ने आरोपियों के विरुद्ध वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 52, 41, 42 एवं वन जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 3, 50, 51 में प्रकरण दर्ज किया गया है। इस सफल कार्रवाई में वन परिक्षेत्राधिकारी सौरभ द्विवेदी के साथ रामबाबू मलालिया, सुखजीत दोहरे, पवन सहरिया, पंकज राजपूत, जितेन्द्र भिलाला, पदम भील, निशांत जैन, धु्रव प्रताप सिंह रघुवंशी, रामलाल माली, गजेन्द्र मीना, अब्दुल सत्तार, हेमराज मीना, केवल भील, नारायण सेन, दयाराम गुर्जर, कन्हैयालाल मीना और अन्य वनकर्मियों की सराहनीय भूमिका रही। वन विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि यह गिरोह कब से इस क्षेत्र में सक्रिय था और इनके तार कहाँ-कहाँ जुड़े हैं। -सीताराम नाटानी