राज्य
30-Apr-2026


फॉरेंसिक जांच में खुलासा, 9 दिनों में बाघिन और 4 शावकों की जान गई; मंडला(ईएमएस)। कान्हा टाइगर रिजर्व में एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत की गुत्थी सुलझ गई है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में इन मौतों का कारण घातक केनाइन डिस्टेंपर वायरस संक्रमण बताया गया है। कान्हा के डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा ने बताया कि जबलपुर स्थित स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ में हुए परीक्षणों में वायरस के संकेत मिले हैं। 9 दिनों में खत्म हुआ बाघिन का कुनबा जानकारी के अनुसार, यह घटनाक्रम सरही परिक्षेत्र की बाघिन ञ्ज-141 और उसके परिवार से जुड़ा है। बाघिन के तीन शावकों की मौत 21 से 25 अप्रैल के बीच हुई थी। इसके बाद गंभीर रूप से बीमार बाघिन और उसके एकमात्र बचे शावक को रेस्क्यू कर मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखा गया, लेकिन 29 अप्रैल को दोनों ने दम तोड़ दिया। श्वसन और तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है वायरस डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि केनाइन डिस्टेंपर वायरस एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से जंगली मांसाहारी जीवों के श्वसन, पाचन और तंत्रिका तंत्र को निशाना बनाती है। शुरुआत में शावकों के पोस्टमार्टम में पेट खाली मिलने और फेफड़ों में संक्रमण की बात सामने आई थी, जो इस वायरस के प्रमुख लक्षण हैं। यह वायरस बाघों के लिए अत्यधिक जानलेवा माना जाता है। कुत्तों से जंगली जानवरों तक फैलता है वायरस जांच में सीडीसी की पुष्टि होने के बाद टाइगर रिजर्व प्रबंधन और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। यह वायरस कुत्तों के माध्यम से जंगली जानवरों तक फैलता है और तेजी से संक्रमण फैलाता है। फिलहाल अंतिम पुष्टि के लिए कुछ और विस्तृत परीक्षण किए जा रहे हैं ताकि वायरस के प्रसार को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें। विनोद उपाध्याय / 30 अप्रैल, 2026