राष्ट्रीय
01-May-2026
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भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर होगा नई दिल्ली,(ईएमएस)। ग्रेट निकोबार द्वीप समूह में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर देश में राजनीतिक और रणनीतिक बहस तेज हो गई है। पूर्व वायुसेना प्रमुख और भारतीय जनता पार्टी के नेता आरकेएस भदौरिया ने इस परियोजना पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भदौरिया ने स्पष्ट किया कि यह प्रोजेक्ट केवल विकास का जरिया नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा। हाल ही में राहुल गांधी ने इस परियोजना को पर्यावरण और आदिवासियों के खिलाफ एक बड़ा अपराध करार दिया था। उन्होंने दावा किया था कि 160 वर्ग किलोमीटर के वर्षावन और लाखों पेड़ों की कटाई से भारी विनाश होगा। हालांकि, इन दावों का जवाब देते हुए आरकेएस भदौरिया ने कहा कि यह नैरेटिव पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने जानकारी दी कि परियोजना से कुल वन क्षेत्र का केवल 1.78 प्रतिशत हिस्सा ही प्रभावित होगा। साथ ही, आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष समितियों का गठन किया गया है, जिससे उनके लिए विकास के नए द्वार खुलेंगे। भदौरिया ने इस मेगा-प्रोजेक्ट के सामरिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांस-शिपमेंट बंदरगाह, एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा (नागरिक और सैन्य उपयोग हेतु), 450 मेगावाट का पावर प्लांट और करीब 6.5 लाख लोगों की क्षमता वाली एक नियोजित टाउनशिप शामिल है। यह परियोजना सामरिक दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत को स्ट्रेट ऑफ मलक्का और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे प्रमुख वैश्विक व्यापारिक मार्गों के बेहद करीब स्थापित करेगी। दुनिया का लगभग 25-30 प्रतिशत व्यापार इसी मार्ग से होता है और चीन का 75 प्रतिशत ऊर्जा आयात इसी रास्ते पर निर्भर है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी क्षमता बढ़ेगी और चीन की बढ़ती गतिविधियों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। वहीं, सैन्य विशेषज्ञों ने भी इस प्रोजेक्ट का समर्थन किया है। पूर्व मेजर जनरल केके सिन्हा ने इसे देश के लिए एक निर्णायक कदम बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ विदेशी शक्तियां और विरोधी देश नहीं चाहते कि भारत इस क्षेत्र में मजबूत हो। उन्होंने देश के भीतर उठ रहे विरोध को एक विशेष एजेंडे का हिस्सा बताते हुए कहा कि यह परियोजना भारत की समुद्री और हवाई शक्ति को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगी। वीरेंद्र/ईएमएस/01मई 2026