रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर नई दिल्ली (ईएमएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) यात्रा भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा देने वाली साबित हुई है। अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान द्वारा भव्य स्वागत के बाद, दोनों शीर्ष नेताओं के बीच गहन द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसके परिणामस्वरूप रक्षा और ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगी है। इन समझौतों से न केवल दोनों देशों के बीच संबंधों में मजबूती आएगी, बल्कि भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी बड़ी भूमिका होगी। सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में से एक रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करना है, जो कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और भविष्य में किसी भी आपूर्ति व्यवधान से निपटने में मदद करेगा। इसके साथ ही, तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति को लेकर भी अहम करार हुआ है, इससे भविष्य में देश में एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और उपभोक्ताओं को संभावित कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। रक्षा संबंधों को और गहरा कर दोनों देशों ने एक नए रणनीतिक रक्षा साझेदारी ढांचे पर भी सहमति जाहिर की है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देगा। आर्थिक मोर्चे पर भी कई बड़े ऐलान किए गए हैं। गुजरात के वाडिनार में जहाजों की मरम्मत के लिए एक विशेष केंद्र (क्लस्टर) बनाने हेतु एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे समुद्री उद्योग में भारत की क्षमता बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त, भारतीय बुनियादी ढांचे, आरबीएल बैंक और सम्मान कैपिटल में कुल 5 अरब अमेरिकी डॉलर के बड़े निवेश की घोषणा की गई है, जिसका उद्देश्य पूंजी प्रवाह और वित्तीय क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देना है। वार्ता के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और इन्हें किसी भी रूप में अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में यूएई के संयम, साहस और दृढ़ता की प्रशंसा कर कहा कि भारत राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए यूएई के नेतृत्व द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना करता है। भारतीय समुदाय के प्रति यूएई सरकार और शाही परिवार द्वारा दिखाई गई परवाह और उन्हें परिवार के सदस्यों की तरह पालने-पोसने के लिए प्रधानमंत्री ने हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने होर्मुज को स्वतंत्र, खुला और सुरक्षित रखने की भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता पर जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन अनिवार्य है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत ने हमेशा मुद्दों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता दी है, और हर परिस्थिति में संयुक्त अरब अमीरात के साथ खड़ा है और खड़ा रहेगा। इस दौरे से पहले, भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (एफईडी) ने एक महत्वपूर्ण मोड़ पर होने वाला बताया था, जिससे दोनों क्षेत्रों के साथ भारत के व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति मिलने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सुरक्षा के लिए यूएई वायुसेना द्वारा दी गई सुरक्षा को भारत की जनता के लिए गौरव का क्षण बताया। आशीष/ईएमएस 16 मई 2026