यूपी से मंगवाए दो दर्जन बुलडोजर कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में एक नई सरकार के गठन के बाद, राज्य में सख्त प्रशासनिक अभियान शुरू हुआ है, जिसमें योगी मॉडल का प्रभाव साफ दिख रहा है। सिलीगुड़ी में अवैध अतिक्रमणों और अनाधिकृत ढांचों को हटाने के लिए बड़े पैमाने पर विध्वंस अभियान की तैयारी हो रही है। दार्जिलिंग के सांसद राजू बिस्टा ने पुष्टि की है कि इस अभियान को गति देने के लिए उत्तर प्रदेश से 24 बुलडोजर मंगाए गए हैं, जो जल्द ही कार्रवाई में दिखाई देने वाले है। इस अभियान की रूपरेखा तय करने के लिए सिलीगुड़ी उपमंडल कार्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक आयोजित की गई थी। इसमें उपमंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम), पुलिस आयुक्त, दार्जिलिंग जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा कानून व्यवस्था को मजबूत करना, अवैध निर्माणों को हटाना, मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाना और अवैध शराब की दुकानों व पबों पर कार्रवाई करना था। बैठक के बाद सांसद बिस्टा ने स्पष्ट किया कि सिलीगुड़ी में बड़े पैमाने पर अनाधिकृत निर्माण हो चुके हैं, जिन्हें कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि इन अवैध ढांचों को तेजी से हटाने के लिए ही उत्तर प्रदेश से दो दर्जन बुलडोजर मंगवाए गए हैं। सांसद बिस्टा ने सिलीगुड़ी नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाकर आरोप लगाया कि वहां पूरे शहर में अवैध निर्माण रोकने में पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकारी जमीन, नदी किनारे और शहर के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों पर हुए अवैध अतिक्रमणों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाना चाहिए, अन्यथा प्रशासन बुलडोजर का इस्तेमाल कर उन्हें ध्वस्त करेगा। सांसद बिस्टा ने कहा कि सिर्फ अतिक्रमण ही नहीं, बल्कि नशीले पदार्थों के नेटवर्क, अवैध नदी खनन, अनाधिकृत टोल वसूली और भूमि दलाली जैसी गतिविधियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। बात दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान, भाजपा नेताओं ने राज्य में योगी मॉडल को लागू करने का वादा किया था। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, आपराधिक गिरोहों और अवैध अतिक्रमणों पर की गई बुलडोजर कार्रवाई ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया था, जिसे कानून व्यवस्था में सुधार और माफिया गतिविधियों पर अंकुश लगाने का श्रेय दिया जाता है। अब बंगाल में शुरू हो रहे ये सख्त उपाय, राज्य में इसी दृष्टिकोण को दोहराने की दिशा में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं, जो प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक नए अध्याय का संकेत देते हैं। आशीष/ईएमएस 16 मई 2026