कान्हा में सीडीवी का बढ़ते जा रहा कहर लगातार हो रही बाघों की मौत से घट रहा कुनबा समय रहते नहीं उठाए जा रहे हैं ठोस कदम बालाघाट (ईएमएस). कान्हा नेशनल पार्क में ‘अदृश्य दुश्मन’ और ‘खामोश कातिल’ का साइलेंट अटैक लगातार हो रहा है। बाघों का कुनबा घटने लगा है। बाघों को बचाने में सिस्टम पूरी तरह से नाकाम हो गया है। कान्हा में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) का वन्य प्राणियों पर अटैक हो रहा है। अब बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीडीवी जैसे घातक संक्रमण की पुष्टि के बावजूद समय पर प्रभावी रोकथाम नहीं होने से बाघों के अस्तित्व पर अब संकट आने लगा है। बावजूद इसके पार्क प्रबंधन लापरवाह बना हुआ है। देश के प्रतिष्ठित कान्हा टाइगर रिजर्व में इन दिनों ‘अदृश्य दुश्मन’ बाघों पर भारी पड़ रहा है। कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) के चलते हो रही लगातार मौतों ने पार्क प्रबंधन की लापरवाही को उजागर कर दिया है। जानकारी के अनुसार बीते दो महीनों में 7 से 8 बाघों की मौत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद न तो किसी की जिम्मेदारी तय की गई है और न ही संक्रमण रोकने के लिए समय रहते कोई ठोस रणनीति लागू की गई। कुत्तों से फैल रहा संक्रमण, फिर भी देर से जागा सिस्टम विशेषज्ञों के मुताबिक सीडीवी वायरस मुख्य रूप से कुत्तों से वन्यजीवों में फैलता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म कर देता है। इसके बावजूद पार्क से लगे गांवों में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण और टीकाकरण जैसे जरूरी कदम समय पर नहीं उठाए गए, जिससे संक्रमण तेजी से फैलता गया। बाघों की लगातार हो रही मौतों ने यह साफ कर दिया है कि खतरे के संकेत पहले से मौजूद थे, लेकिन प्रबंधन ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और कब तक कार्रवाई होगी। अमाही, सरही रेंज पर आवाजाही पर प्रतिबंध बाघों की मौतों के बाद अब प्रबंधन हरकत में आया है। प्रभावित क्षेत्रों जैसे अमाही और सरही रेंज में 2 किलोमीटर के दायरे को क्वारंटाइन किया गया है। यहां आम लोगों और पर्यटकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही, पार्क से सटे गांवों में कुत्तों के टीकाकरण का अभियान शुरू किया गया है, ताकि संक्रमण के स्रोत को खत्म किया जा सके। ट्रैप कैमरों से निगरानी, लेकिन सवाल बरकरार वन अमला और पशु चिकित्सकों की टीम अब ट्रैप कैमरों और गश्त के जरिए बाघों व अन्य मांसाहारी जीवों की निगरानी कर रही है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जब खतरा पहले से था, तो ये कदम पहले क्यों नहीं उठाए गए? एनटीसीए ने जारी किया अलर्ट कान्हा में हुई मौतों के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने भी सभी राज्यों को अलर्ट जारी किया है और सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कान्हा में बाघों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।