बिलासपुर (ईएमएस)। मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक मामले को लेकर बिलासपुर में छात्रों का गुस्सा खुलकर सामने आया। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने पूरे मामले को देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात बताया। ज्ञापन का नेतृत्व छात्र संगठन के जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह ने किया। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हुए पेपर लीक ने शिक्षा व्यवस्था की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना था कि लाखों विद्यार्थी वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था की कथित विफलता और एजेंसी की लापरवाही ने विद्यार्थियों का भविष्य संकट में डाल दिया। दोबारा परीक्षा से बढ़ी विद्यार्थियों की परेशानी ज्ञापन में कहा गया कि पेपर लीक की पुष्टि के बाद परीक्षा निरस्त करनी पड़ी और दोबारा परीक्षा की घोषणा से करीब 22 लाख से अधिक विद्यार्थी मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति में आ गए हैं। संगठन ने दावा किया कि कई राज्यों से विद्यार्थियों में अवसाद और आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। एजेंसी पर निष्पक्ष परीक्षा कराने में विफल रहने का आरोप छात्र संगठन ने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और प्रशासनिक विफलताओं से यह स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी देशभर की परीक्षाएं सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से आयोजित करने में असफल रही है। इसी आधार पर संगठन ने एजेंसी को तत्काल भंग कर नई पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई। ज्ञापन में रखी गईं पांच प्रमुख मांगें संगठन ने राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें पेपर लीक मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच, दोषियों और कथित कोचिंग माफियाओं पर सख्त कार्रवाई, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को भंग करना, आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिवारों को सहायता देना तथा भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून बनाने की मांग शामिल है। शिक्षा मंत्री की जवाबदेही पर भी उठाए सवाल कलेक्टर कार्यालय पहुंचे छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान संगठन ने कहा कि देश के युवाओं का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है और केंद्र सरकार को पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो विद्यार्थियों का विश्वास राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था से पूरी तरह खत्म हो सकता है। मनोज राज 22 मई 2026