-भारत समेत चार देशों की रणनीतिक पहल नई दिल्ली,(ईएमएस)। ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के विदेश मंत्रियों ने फिजी में एक नए बंदरगाह के निर्माण पर सहमति जताकर प्रशांत महासागर क्षेत्र में बड़ा रणनीतिक संदेश दिया है। नई दिल्ली में आयोजित क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान इस परियोजना की घोषणा की गई। इसे चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में क्वाड का पहला बड़ा साझा इंफ्रास्ट्रक्चर कदम माना जा रहा है। बैठक में ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो शामिल हुए थे। अमेरिका के विदेश मंत्री रूबियो ने कहा कि प्रशांत द्वीपीय देशों में बंदरगाह क्षमता की कमी को दूर करने के लिए क्वाड देश फिजी के साथ मिलकर काम करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, फिजी में बंदरगाह निर्माण का उद्देश्य केवल व्यापारिक ढांचा मजबूत करना नहीं है, बल्कि यह प्रशांत महासागर में चीन की बढ़ती सैन्य और आर्थिक सक्रियता का जवाब भी है। चीन पिछले कई वर्षों से छोटे द्वीपीय देशों को कर्ज देकर वहां अपने प्रभाव का विस्तार कर रहा है। हाल ही में सोलोमन आइलैंड्स के साथ चीन के सुरक्षा समझौते ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता बढ़ा दी थी। भारत के लिए यह परियोजना कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिजी की आबादी में लगभग 37 प्रतिशत लोग भारतीय मूल के हैं और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक व ऐतिहासिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। फिजी में करीब तीन लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिन्हें गिरमिटिया समुदाय के रूप में जाना जाता है। भारत इस परियोजना के जरिए प्रशांत द्वीपीय देशों के संगठन एफआईपीआईसी (फोरम फॉर इंडिया-पेसिफिक आइस्लेंड्स कोपरेशन) के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करना चाहता है। इसके अलावा समुद्री सुरक्षा, अवैध मछली पकड़ने और संदिग्ध जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने में भी यह बंदरगाह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक केवल रणनीतिक चर्चा तक सीमित माने जाने वाले क्वाड ने इस परियोजना के जरिए यह संकेत दिया है कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन को सीधे चुनौती देने के लिए तैयार है। हिदायत/ईएमएस 28 मई 2026