29-May-2026
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:: गौशाला परिसर में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत तालाब और नक्षत्र वाटिका का भी किया जा रहा विकास :: इंदौर (ईएमएस)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष पहल पर इंदौर जिले के ग्राम आशापुरा में विकसित की जा रही वृहद और आधुनिक गौशाला का शुक्रवार को कलेक्टर शिवम वर्मा ने अधिकारियों के दल के साथ औचक निरीक्षण किया। इस अवसर पर जिला पंचायत के सीईओ सिद्धार्थ जैन, स्वामी अच्युतानंद महाराज और एसडीएम महू राकेश परमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित थे। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए ताकि गौवंश संरक्षण एवं सेवा का लाभ जल्द से जल्द मिल सके। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंशानुरूप आशापुरा में गौमाताओं के लिए एक विशाल एवं सर्वसुविधायुक्त गौशाला तैयार की जा रही है। इसका निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है और कार्य पूर्ण होने के बाद यहां लगभग 10 हजार गौमाताओं के सुरक्षित निवास, चारे और उत्तम देखभाल की पुख्ता व्यवस्था हो सकेगी। :: गौसेवा के साथ पर्यावरण और जल संरक्षण का बनेगा आदर्श केंद्र :: कलेक्टर वर्मा ने स्पष्ट किया कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना केवल गौसेवा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन के एक बड़े मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत गौशाला परिसर में ही एक विशाल तालाब का निर्माण कराया गया है। इसके साथ ही क्षेत्र में जलस्तर सुधारने के लिए आसपास के नालों की व्यापक सफाई, बोरी बंधान और चेक डैम निर्माण जैसे कार्य भी किए जा रहे हैं, ताकि आगामी वर्षा जल का अधिकतम संचयन और संरक्षण किया जा सके। :: परिसर में विकसित होगी नक्षत्र वाटिका, प्राचीन बावड़ी का भी होगा जीर्णोद्धार :: परियोजना की विशिष्टता बताते हुए कलेक्टर ने कहा कि गौशाला परिसर में एक भव्य नक्षत्र वाटिका का भी विकास किया जा रहा है, जिससे यह पूरा क्षेत्र गौसंवर्धन, जल संरक्षण और हरियाली का एक अनूठा व आदर्श केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी कार्यों को समय सीमा में पूर्ण कर इसे शीघ्र ही गौमाताओं को समर्पित कर दिया जाएगा। इस दौरे के दौरान कलेक्टर शिवम वर्मा ने समीपस्थ ग्राम बड़गोनंदा का भी रुख किया, जहां उन्होंने प्राचीन काल की ऐतिहासिक बावड़ी का अवलोकन किया। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत इस प्राचीन बावड़ी का भी कायाकल्प और जीर्णोद्धार कराया जा रहा है ताकि ग्रामीण क्षेत्र के जलस्रोतों को पुनर्जीवित किया जा सके।