- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और होर्मुज में फंसे जहाज भी चुनौती नई दिल्ली (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में गहराते तनाव के मद्देनजर भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में जुट गया है। केंद्र सरकार ने सरकारी तेल कंपनियों को आपात स्थिति से निपटने के लिए कम से कम 30 दिनों का एलपीजी रिजर्व स्टॉक तैयार रखने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कच्चे तेल का अतिरिक्त भंडार बनाने पर भी काम जारी है, ताकि किसी भी संकटकाल में देश में गैस या ईंधन की किल्लत न हो। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी इस निर्देश का उद्देश्य देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं; फरवरी के 69.01 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर मई में यह 106.83 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इस भारी उछाल से भारतीय तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 550 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है, जिसका सीधा परिणाम पिछले 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल में करीब 7.5 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि के रूप में सामने आया है। वर्तमान में भारत की दैनिक एलपीजी मांग लगभग 72,000 मीट्रिक टन है, जबकि घरेलू रिफाइनरियां प्रतिदिन 52,000 मीट्रिक टन का उत्पादन कर रही हैं। शेष आवश्यकता को पूरा करने के लिए रिफाइनरियों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। उधर, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव ने भी चिंता बढ़ा दी है, जहाँ भारत के 13 जहाज, जिनमें 1 एलपीजी कैरियर और 5 कच्चे तेल के जहाज शामिल हैं, फंसे हुए हैं। पोत परिवहन मंत्रालय इन जहाजों की सुरक्षित वापसी पर लगातार नजर बनाए हुए है। सतीश मोरे/30मई ---