क्षेत्रीय
03-Jun-2026
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- आधुनिक ड्रोन और क्रेनों से छोड़े गुब्बारे तो पुरातन बैलगाडिय़ों ने बिखेरी छटा, श्रद्धालुओं ने रजत पात्रों में धुलाए चरण - मुस्लिम समाज सहित सर्वसमाज ने किया स्वागत, दो किमी से अधिक लंबा रहा जुलूस गुना (ईएमएस)। अंचल के इतिहास में बुधवार का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब जैनाचार्य विद्यासागरजी महाराज के शिष्य, मुनि पुंगव निर्यापक संत सुधासागरजी महाराज ससंघ का पूरे 13 वर्षों के बाद गुना नगरी में ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ। इस महामहोत्सव को लेकर समूचे गुना नगर को दुल्हन की तरह सजाया गया था। मुनिश्री के आगमन से पूरी नगरी धर्ममय हो गई और कैंट से लेकर बीजी रोड स्थित ऋषभायत नसियांजी तक का मार्ग श्रद्धालुओं के सैलाब से पट गया। इससे पूर्व, गत शाम को पैदल विहार करते हुए मुनिसंघ कैंट क्षेत्र में पहुंचा था, जहां एक निजी स्कूल में रात्रि विश्राम के बाद बुधवार सुबह दिव्य घोष और शंखनाद के साथ विशाल चल समारोह का शुभारंभ हुआ। हनुमान चौराहे पर जैसे ही मुनिसंघ का शुभागमन हुआ, वहां उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया। इस मुख्य चौराहे पर तीन विशाल क्रेनों के माध्यम से मुनिसंघ की भव्य वंदना की गई और क्रेन की मदद से ही आसमान से रंग-बिरंगे बैलून्स (गुब्बारे) बरसाए गए। इसी स्थान पर नगरपालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने मुनिश्री के पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद लिया। सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए मुस्लिम समाज सहित विभिन्न समाजों के प्रमुखों ने भी मुनिश्री की अगवानी की और मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद जब यह काफिला आगे बढ़ा, तो भुल्लनपुरा सहित अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से विभोर होकर रजत (चांदी) के पात्रों में मुनिश्री के चरण पखारे। बजरंगगढ़ कमेटी के अध्यक्ष इंजीनियर एसके जैन और महाममंत्री प्रदीप जैन ने संयुक्त रूप से बताया कि इस भव्य अगवानी जुलूस में आधुनिकता और पुरातन संस्कृति का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। एक तरफ जहां कोटा, राजस्थान से आई विशेष ड्रोन टीम हवा में उडक़र मुनिश्री और श्रद्धालुओं पर लगातार पुष्प वर्षा कर आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ जुलूस में शामिल 21 पारंपरिक बैलगाडय़िाँ हमारी पुरातन और पौराणिक जैन परंपराओं की जीवंत छटा बिखेर रही थीं। इस दो किलोमीटर से भी लंबे ऐतिहासिक जुलूस में सबसे आगे जैन धर्म की गगनचुंबी धर्म ध्वजा और विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के बैनर चल रहे थे। चल समारोह को व्यवस्थित गति देने के लिए जैन धर्म का मुख्य उद्घोषक वाहन सबसे आगे धार्मिक नारे लगाते हुए चल रहा था, जिसके पीछे मुनिश्री के चित्रों से सजे हाथ ठेले, जिन शासन के शेर की भव्य झांकी, गुरुदेव का विशाल स्टेचू और टमटम वाहनों पर आकर्षक चलचित्रों का प्रदर्शन किया जा रहा था। चल समारोह के वैभव को बढ़ाने के लिए 21 सुसज्जित घुड़सवार, 24 कलात्मक बग्घियां, 51 दिव्य ढोल और सागर की सुप्रसिद्ध डपला पार्टी के कलाकार अपनी अनूठी प्रस्तुतियां दे रहे थे। वहीं सिलवानी का प्रसिद्ध अखाड़ा अपनी हैरतअंगेज व्यायाम कला के माध्यम से समाज को स्वास्थ्य और सुरक्षा का संदेश दे रहा था। जोधपुर से आई डांस पार्टी और विभिन्न बैंडों ने धार्मिक धुनों से समां बांध दिया। इस भव्यता को निखारने में स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ राजस्थान और उत्तर प्रदेश से आए विशेष हुनरमंदों का बड़ा योगदान रहा। समूचे जुलूस मार्ग पर जबलपुर, ललितपुर और अशोकनगर के कलाकारों द्वारा बनाई गई 40 बाई 40 फीट की महाकाय और आकर्षक रंगोलियां मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। इस महा-चल समारोह में जैन समाज की नारी शक्ति ने भी बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। दिगंबर जैन महिला महासमिति संभाग गुना, श्रुत आराधना महिला मंडल, सर्वोदय महिला मंडल, पारसनाथ महिला मंडल, भक्तामर मंडल, शीतल नाथ ग्रुप, त्रिमूर्ति महिला मंडल, सोशल ग्रुप वर्धमान, मृदु महिला मंडल, एकता ग्रुप पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, जैन महिला मिलन, आरोही जैन मिलन, अहिंसा जैन ग्रुप, खंडेलवाल महिला ग्रुप और आदिनाथ महिला मंडल कैंट की सदस्य बहनें पारंपरिक परिधानों में लेजम और डीजे की सुमधुर धुनों पर थिरकती हुई चल रही थीं। मुनी सेवा संघ के दिव्य घोष ने अपने शंखनाद से पूरे वातावरण को गुंजायमान कर दिया। जुलूस के सबसे पवित्र और मुख्य भाग में मुनिसंघ के साथ ब्रह्मचारी भैया-बहनें और हजारों की संख्या में श्वेत वस्त्र धारी पुरुष वर्ग चल रहा था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित नगर के विभिन्न सामाजिक और व्यापारिक संगठनों ने भी मुनिसंघ का आत्मीय स्वागत किया। मुनिसुव्रतनाथ जिनालय, हाट रोड, रपटा, निचला बाजार, सदर बाजार, सुगन चौराहा और जयस्तंभ चौराहा होते हुए यह जुलूस ऋषभायत नसियांजी पहुंचा, जहां मुनिश्री के संक्षिप्त मांगलिक प्रवचन हुए और उसके बाद मुनिसंघ की परम पावन आहारचर्या संपन्न हुई। इस मंगल प्रवेश के साथ ही अब आगामी 17 जून से मुनिसंघ के परम सानिध्य में भव्य पंचकल्याणक महोत्सव का शंखनाद होने जा रहा है। - सीताराम नाटानी