-अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने कहा- हमारे अभियानों में उसने कोई बाधा नहीं डाली वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाउस एप्रोप्रियेशन्स सबकमेटी की सुनवाई में कहा कि अमेरिका को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि मौजूदा क्षेत्रीय संकट में चीन ने ईरान को सैन्य मदद की हो। रुबियो ने बताया कि उन्होंने बीजिंग से अपील की कि वह होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन खुलवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करें। रुबियो ने कहा कि मैं कहूंगा कि चीन ने ईरान को किसी भी तरह की सहायता नहीं दी है और न ही उसने हमारे अभियानों या हमारी काम करने की क्षमता में कोई बाधा डाली है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्री ने माना कि ईरान के पास चीन में बने कुछ सैन्य उपकरण हैं और दोनों देशों के बीच लंबे समय से संबंध हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिका ने हाल के संघर्ष में चीन की ओर से ऐसी कोई गतिविधि नहीं देखी है जिससे युद्ध की स्थिति या सैन्य संतुलन पर कोई असर पड़ा हो। रुबियो ने चीन के रवैये को सावधानीपूर्ण बताया। उनका कहना था कि बीजिंग ने ईरान के साथ अपने व्यापक रणनीतिक संबंधों के बावजूद इस संकट में सीधे तौर पर शामिल होने से बचने की कोशिश की है। साथ ही रुबियो ने चीन से संयुक्त राष्ट्र में ज्यादा रचनात्मक भूमिका निभाने की अपील की, खासकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री यातायात में आ रही बाधाओं को दूर करने के प्रयासों में। रुबियो के मुताबिक अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव का समर्थन कर रहा है, जिसका उद्देश्य इस अहम समुद्री मार्ग में पैदा हुई स्थिति का समाधान करना है। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। रुबियो ने कहा कि अगर वास्तव में वे जलडमरूमध्य को बंद किए जाने के खिलाफ हैं, तो उन्हें इस प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए या कम से कम इससे दूरी बनाते हुए वीटो का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थिरता बहाल करने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए चीन के पास मजबूत आर्थिक कारण हैं, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर काफी निर्भर है। रुबियो ने कहा कि समय बीतने के साथ चीन की अर्थव्यवस्था पर ईरान की इन गतिविधियों का नकारात्मक असर पड़ना शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि चीन दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक देशों में से एक है और अगर समुद्री मार्गों में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है, तो इसका असर ऊर्जा आपूर्ति और निर्यात बाजारों दोनों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि चीन जैसी निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए यह समस्या पैदा कर सकता है। अगर दुनिया भर के देशों की खरीदने की क्षमता कम होने लगे क्योंकि उन्हें ईंधन पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है, तो इसका असर चीन के निर्यात पर भी पड़ेगा। इन टिप्पणियों से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक मुद्दों में से एक पर चीन की भूमिका को लेकर वॉशिंगटन के मौजूदा आकलन की झलक मिलती है। भारत के लिए भी यह घटनाक्रम खास महत्व रखता है, क्योंकि चीन और भारत दोनों ही खाड़ी क्षेत्र से आने वाले ऊर्जा संसाधनों के बड़े आयातक हैं। यदि होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय तक व्यवधान बना रहा, तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और पूरे एशिया की सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। सिराज/ईएमएस 03जून26