नेपाल के विदेश मंत्री खनाल ने फिर उठाया कालापानी-लिपुलेख का मुद्दा -जयशंकर और डोभाल से मुलाकात में कहा- सहमति के बिना नहीं होने चाहिए समझौते नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत दौरे पर आए नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने एक बार फिर कालापानी और लिपुलेख क्षेत्र को लेकर नेपाल का दावा दोहराते हुए इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया है। नेपाली विदेश मंत्री के इस बयान ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब उन्होंने नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की है। कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े एक प्रश्न के जवाब में खनाल ने कहा कि यात्रा कई अलग-अलग सीमा मार्गों से संचालित होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु नेपाल के रास्ते भी यात्रा करते हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल की मुख्य चिंता कालापानी और लिपुलेख क्षेत्र को लेकर भारत और चीन के बीच हुए समझौतों से जुड़ी है। उनके अनुसार नेपाल लगातार यह कहता रहा है कि यह क्षेत्र उसका हिस्सा है और नेपाल की सहमति के बिना किसी तीसरे पक्ष के साथ इस क्षेत्र से संबंधित समझौते नहीं किए जाने चाहिए। नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा कि उनके देश ने इस संबंध में कूटनीतिक माध्यमों और आधिकारिक नोट के जरिए अपना पक्ष भारत और चीन दोनों के समक्ष स्पष्ट रूप से रखा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच संवाद और आपसी सम्मान के आधार पर किसी भी जटिल मुद्दे का समाधान निकाला जा सकता है। खनाल ने अपने बयान में भारत-नेपाल संबंधों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अतीत के विवादों से आगे बढ़कर साझा विकास, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय समृद्धि पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनके अनुसार नेपाल एक महत्वाकांक्षी और विकासोन्मुखी राष्ट्र के रूप में भारत के साथ मजबूत साझेदारी चाहता है। नेपाल में हाल के राजनीतिक परिवर्तनों और युवाओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए खनाल ने कहा कि हालिया जनआंदोलनों ने देश की राजनीति को नई दिशा दी है। वहीं अग्निवीर योजना में नेपाली युवाओं की भर्ती के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यदि भारत इस विषय पर औपचारिक चर्चा करना चाहे तो नेपाल बातचीत के लिए तैयार है। अपने संबोधन में खनाल ने भारत की आर्थिक और तकनीकी प्रगति की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि भारत आज वैश्विक मंच पर तेजी से उभरती हुई आर्थिक और तकनीकी शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है और नेपाल इस विकास यात्रा का साझेदार बनना चाहता है। हालांकि, कालापानी और लिपुलेख को लेकर दिए गए उनके बयान ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है। हिदायत/ईएमएस 07जून26