07-Jun-2026
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- विशाल चल समारोह निकला सारंगपुर (ईएमएस)। भारतीय इतिहास के महान योद्धा, मेवाड़ के शूरवीर शासक और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप की जयंती प्रतिवर्ष ज्येष्ठ शुक्ल हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को राजस्थान के कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था। इस वर्ष उनकी 486 वीं जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर राठी मांगलिक परिसर से विशाल चल समारोह निकाला गया जिसमे बेंड, डिजे ढोल, घोड़ी एवं खुली गाड़ी मे राज्यवर्धन सिह नरसिहगढ, प्रियव्रत सिंह खिलचीपुर, जसवन्त हाडा शुजालपुर, राजपूत समाज जिलाध्यक्ष मंयक प्रताप सिंह, रामवीर सिह सिकरवार सवार थे चल समारोह न्यू बस से शुरू हो कर नया अस्पताल,एस डी एम चौराहा,बाग कुआँ टंकी चौक, जमा मज्जिद, सरदार बाजार से निकल कर भेरू दरवाजा, राजीव गांधी चोराहे से पुनः राठी परिसर मे समापन हुआ । कार्यक्रम मे समाज के अनेक वरिष्ठ जन अतिथि के रूप में शामिल हुए । चल समारोह मे सभी राजपूत सरदार एवं करणी सेना के सरदारअपनी वेषभूषा में साफा बांधकर चल रहे थे। चल समारोह का अनेक स्थानो पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान अनेक वक्ताओ ने कहा कि महाराणा प्रताप का नाम भारतीय इतिहास में अदम्य साहस, पराक्रम, त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण के लिए स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। उन्होंने जीवनभर मेवाड़ की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्ष किया और कभी भी मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की। वर्ष 1576 में लड़ा गया हल्दीघाटी का युद्ध भारतीय इतिहास के सबसे प्रसिद्ध युद्धों में से एक माना जाता है। इस युद्ध में महाराणा प्रताप ने सीमित संसाधनों के बावजूद अद्वितीय वीरता का परिचय दिया। उनके प्रिय अश्व चेतक की स्वामिभक्ति और बलिदान की कथा आज भी लोगों को प्रेरित करती है। महाराणा प्रताप ने कठिन परिस्थितियों में जंगलों और पहाड़ों में रहकर भी अपने स्वाभिमान और स्वतंत्रता से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने अपने राज्य और प्रजा की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी तथा संघर्षों के बीच भी धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। महाराणा प्रताप का जीवन आज भी यह प्रेरणा देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के मूल्यों की रक्षा के लिए दृढ़ता से खड़े रहना चाहिए। उनका त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा। .../ 7 जून /2026