07-Jun-2026
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सारंगपुर (ईएमएस)। स्थानीय महावीर अतिशय क्षेत्र बडा मंदिर मे आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुनि श्री प्रवर सागर जी ने कहा कि किसी भी कार्य की सफलता का मूल आधार विश्वास होता है। संसार का समस्त व्यवहार विश्वास पर ही चलता है। यदि व्यक्ति के मन में श्रद्धा और विश्वास है तो वह कठिन से कठिन परिस्थितियों का भी सामना कर सकता है, लेकिन विश्वास डगमगा जाने पर जीवन में अस्थिरता और निराशा घर कर जाती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ और महान है। मनुष्य में तप, त्याग और उपवास करने की अद्भुत क्षमता होती है। यही कारण है कि मनुष्य अनेक प्रकार की साधनाएं कर सकता है, जबकि सौधर्म इन्द्र सहित अन्य इन्द्र भी कुछ ऐसे धार्मिक पुरुषार्थ नहीं कर सकते जो मनुष्य जीवन में संभव हैं। इसलिए मानव जीवन को केवल भोग-विलास में न गंवाकर धर्म, साधना और आत्मकल्याण में लगाना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि भारत भूमि अत्यंत पुण्यशाली है। यहां सम्मेद शिखरजी और अयोध्या जैसी पवित्र एवं मोक्षदायिनी भूमि स्थित हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि इस देश की आध्यात्मिक परंपरा कितनी समृद्ध रही है और यहां जन्म लेने वाले जीवों को धर्म साधना के विशेष अवसर प्राप्त होते हैं। ऐसे पवित्र स्थलों का स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा रखना भी महान पुण्य का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि जीवन में कितनी भी विपत्ति, संकट या दुःख क्यों न आ जाए, व्यक्ति को पंच परमेष्ठी के प्रति अपनी श्रद्धा कभी नहीं छोड़नी चाहिए। कठिन समय में धर्म और आस्था ही मनुष्य को संभालने का कार्य करते हैं। जो व्यक्ति संकट के समय भी अपने धर्म और आराधना से जुड़ा रहता है, वह अंततः मानसिक शक्ति और आत्मबल प्राप्त करता है। मुनिश्री ने समाज को परस्पर सहयोग और संवेदना का संदेश देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति दुःखी है, परेशान है या किसी संकट से गुजर रहा है तो उसे हिम्मत और सहारा देना चाहिए। किसी को गिराने, अपमानित करने या उसकी कमजोरी का लाभ उठाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। यह प्रकृति का नियम है कि जो दूसरों को गिराने का प्रयास करता है, वह स्वयं भी एक दिन गिरता है। जबकि जो दूसरों को संभालता है, उसे समाज में सम्मान और आत्मिक संतोष प्राप्त होता है। उन्होंने परिवारों में शांति और सद्भाव बनाए रखने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जिस घर में प्रेम, आपसी समझ और शांति का वातावरण होता है, वह घर स्वर्ग के समान होता है। वहां रहने वाले सभी सदस्यों के जीवन में सुख, संतोष और आनंद बना रहता है। इसके विपरीत जिस घर में प्रतिदिन विवाद, कलह और क्रांति का वातावरण बना रहता है, वह घर नर्क के समान बन जाता है। इसलिए परिवार के प्रत्येक सदस्य को संयम, सहनशीलता और प्रेम का व्यवहार अपनाना चाहिए। धर्मसभा के अंत में मुनिश्री ने सभी श्रद्धालुओं से पंच परमेष्ठी में अटूट विश्वास रखने, दूसरों की सहायता करने तथा परिवार और समाज में शांति एवं सद्भाव का वातावरण निर्मित करने का आह्वान किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। .../ 7 जून /2026