- सहयोगी दलों के पुराने बयानों से गरमाई सियासत नई दिल्ली (ईएमएस)। विपक्षी दलों के मंच इंडिया गठबंधन की प्रस्तावित बैठक से पहले राजधानी दिल्ली में लगी पोस्टरों की एक श्रृंखला ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। इन पोस्टरों में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते हुए विभिन्न विपक्षी नेताओं के पुराने बयानों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। इससे विपक्षी एकता और गठबंधन की आंतरिक स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दिल्ली में लगाए गए पोस्टरों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केरल के वामपंथी नेता पिनराई विजयन, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान तथा डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन के उन बयानों का उल्लेख किया गया है, जिनमें उन्होंने अलग-अलग समय पर राहुल गांधी या कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियां की थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्टरबाजी ऐसे समय में हुई है जब विपक्षी दल आगामी चुनावी रणनीति को लेकर एकजुटता दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इंडिया गठबंधन की बैठक में आम आदमी पार्टी के शामिल न होने और डीएमके की नाराजगी की चर्चाओं ने इन पोस्टरों को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया है। पोस्टरों में शरद पवार के उस बयान का हवाला दिया गया है जिसमें उन्होंने राहुल गांधी में निरंतरता की कमी बताई थी। वहीं केरल के वामपंथी नेता पिनराई विजयन के पुराने बयान को भी प्रमुखता से जगह दी गई है, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर सवाल उठाए थे। आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के चुनावी भाषणों के अंश भी पोस्टरों में शामिल किए गए हैं, जिनमें उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ वोट देने की अपील की थी। इसी तरह ममता बनर्जी के उस बयान को भी उद्धृत किया गया है जिसमें उन्होंने कांग्रेस की घटती राजनीतिक विश्वसनीयता पर टिप्पणी की थी। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन के पुराने बयानों को भी पोस्टरों में स्थान मिला है। स्टालिन का वह कथन भी चर्चा में है जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेताओं की तुलना उसी नाव में छेद करने वालों से की थी जिसमें वे स्वयं सवार हों। कांग्रेस नेताओं ने इस पोस्टरबाजी को विपक्षी एकता को कमजोर करने की कोशिश बताया है। पार्टी का दावा है कि इंडिया गठबंधन की बैठक में 23 से अधिक दल भाग ले रहे हैं और विपक्षी एकजुटता पहले से अधिक मजबूत है। हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन पोस्टरों ने विपक्षी दलों के बीच मौजूद वैचारिक और राजनीतिक मतभेदों को फिर से सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया है। ऐसे में आगामी बैठक में विपक्षी दल किस तरह एकजुटता का संदेश देते हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। विपक्ष की रणनीति, नेतृत्व और भविष्य की दिशा को लेकर यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।