राष्ट्रपति ट्रंप के साथ संभावित मुलाकात पर दुनिया की नजरें नई दिल्ली(ईएमएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगामी जी 7 समिट में भाग लेने के लिए फ्रांस जाना पूरी तरह तय हो गया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस बेहद महत्वपूर्ण महा-दौरे पर अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी है, जिसके बाद से वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। यह हाई-प्रोफाइल समिट आगामी 16 और 17 जून 2026 को फ्रांस के खूबसूरत शहर इवियन में आयोजित होने जा रही है। इस दौरे को लेकर दुनिया भर में कयासों और चर्चाओं का बाजार इसलिए गर्म है, क्योंकि माना जा रहा है कि इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आमने-सामने आना लगभग तय है। हालांकि, अभी तक दोनों दिग्गजों की इस संभावित द्विपक्षीय मुलाकात को लेकर कोई पक्की समय-सारणी या आधिकारिक टाइम टेबल जारी नहीं किया गया है, लेकिन पर्दे के पीछे वैश्विक राजनीति और व्यापार की एक नई पटकथा लिखे जाने की उम्मीद जताई जा रही है। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जी 7 देशों के प्रमुखों के अलावा कई अन्य आमंत्रित मेहमान देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के शीर्ष नेतृत्व के साथ विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर खुलकर चर्चा करेंगे। इस बार की समिट का मुख्य फोकस नई अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां बनाने, वैश्विक एकजुटता का प्रदर्शन करने, मंदी की ओर बढ़ रही आर्थिक तरक्की को दोबारा पटरी पर लाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सुरक्षित व जिम्मेदार तरीके से आगे बढ़ाने पर केंद्रित होगा। इस बहुपक्षीय सम्मेलन के एजेंडे से इतर पीएम मोदी की कई राष्ट्राध्यक्षों के साथ होने वाली अलग से द्विपक्षीय बैठकें भी गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं। खासकर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली संभावित बातचीत पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, जिन्होंने पिछले हफ्ते ही खुद इस समिट में शामिल होने के लिए फ्रांस जाने का ऐलान किया था। अगर यह मुलाकात होती है, तो फरवरी में पीएम मोदी के अमेरिका दौरे के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली आमने-सामने की सीधी और औपचारिक बातचीत होगी। भारत और अमेरिका के बीच हाल के महीनों में कई मुद्दों पर फोन के जरिए लगातार उच्च स्तरीय संवाद बना हुआ है। पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी भारत का दौरा किया था, जिसने दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को एक नई दिशा दी है। रुबियो ने अपनी यात्रा के दौरान रक्षा, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी, ट्रेड, एनर्जी सिक्योरिटी और शैक्षणिक सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की थी। इस पृष्ठभूमि में, यदि फ्रांस की धरती पर मोदी-ट्रंप की बैठक होती है, तो दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित महा-ट्रेड डील को अंतिम रूप दिया जा सकता है। इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते को अमली जामा पहनाने के लिए जून के पहले हफ्ते में ही अमेरिकी अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम ने भारत का दौरा कर सामानों के व्यापार, कस्टम नियमों और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर लंबी बैठकें की हैं। इसके अलावा, मौजूदा वैश्विक ईरान संकट के बीच कच्चे तेल की किल्लत, ऊर्जा सुरक्षा और तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने जैसे रणनीतिक मुद्दों पर भी इस समिट के दौरान गहन विचार-विमर्श होने की पूरी संभावना है। वीरेंद्र/ईएमएस 11 जून 2026