-इंडिया गठबंधन की बढ़ी चिंता, लोकसभा में विपक्ष का आंकड़ा 200 से नीचे जाने का खतरा नई दिल्ली,(ईएमएस)। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को कड़ी चुनौती देने वाला विपक्षी इंडिया गठबंधन अब गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है। सहयोगी दलों के अलग होने, आंतरिक मतभेदों और लगातार चुनावी पराजयों ने विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच संसद में विपक्ष की ताकत लगातार कमजोर होती दिखाई दे रही है। हाल के घटनाक्रमों में डीएमके और आम आदमी पार्टी द्वारा इंडिया गठबंधन से दूरी बनाए जाने के बाद लोकसभा में विपक्षी गठबंधन की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर संभावित असंतोष और विभाजन की स्थिति विपक्ष की स्थिति को और कमजोर कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो लोकसभा में इंडिया गठबंधन का आंकड़ा 190 से नीचे पहुंच सकता है। दूसरी ओर भाजपा इन परिस्थितियों को अपने लिए अवसर के रूप में देख रही है। वर्तमान में लोकसभा में भाजपा के पास 240 सांसद हैं और पार्टी अपने दम पर बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्षी दलों में टूट-फूट जारी रहती है तो भाजपा की स्थिति और मजबूत हो सकती है। राज्यसभा में भी बदलते राजनीतिक समीकरणों का असर दिखाई देने लगा है। विपक्षी दलों के भीतर असंतोष और संभावित दल-बदल की अटकलों के बीच एनडीए की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इससे सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में पहले की तुलना में अधिक आसानी हो सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि संसद के दोनों सदनों में सरकार की स्थिति और मजबूत होती है तो महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन, परिसीमन और अन्य महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का रास्ता आसान हो सकता है। हालांकि इन विषयों पर अंतिम निर्णय संसद की प्रक्रियाओं और राजनीतिक सहमति पर निर्भर करेगा। विपक्ष में असंतोष बढ़ा लगातार चुनावी हार ने भी विपक्षी गठबंधन के भीतर असंतोष बढ़ाया है। हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे राज्यों में मिले झटकों के बाद कई क्षेत्रीय दल कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर खुलकर सवाल उठाने लगे हैं। वर्तमान में विपक्षी गठबंधन की सरकारें सीमित राज्यों तक सिमट गई हैं, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में उसकी प्रभावशीलता को लेकर बहस तेज हो गई है। आने वाले महीनों में संसद और राज्यों की राजनीति में होने वाले घटनाक्रम यह तय करेंगे कि विपक्ष अपने संगठनात्मक संकट से उबर पाता है या एनडीए की बढ़ती राजनीतिक बढ़त और मजबूत होती है। हिदायत/ईएमएस 11 जून 2026