राष्ट्रीय
11-Jun-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर आयुष मंत्रालय ने एक पोस्ट साझा कर माइग्रेन जैसी गंभीर समस्या से राहत पाने के लिए योग को प्रभावी और प्राकृतिक उपाय बताया है। मंत्रालय का कहना है कि नियमित योगाभ्यास से माइग्रेन की तीव्रता और आवृत्ति को काफी हद तक कम किया जा सकता है। माइग्रेन सामान्य सिरदर्द से अलग और अधिक जटिल समस्या मानी जाती है। इसमें सिर के एक हिस्से में तेज दर्द के साथ जी मिचलाना, चक्कर आना, तेज रोशनी और तेज आवाज से परेशानी जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आज की व्यस्त जीवनशैली, लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन का उपयोग, गलत मुद्रा में बैठकर काम करना, पर्याप्त नींद न लेना और लगातार मानसिक तनाव माइग्रेन की समस्या को बढ़ावा देते हैं। इन कारणों से गर्दन, कंधों और सिर की मांसपेशियों में तनाव उत्पन्न होता है, जो माइग्रेन के दौरे को ट्रिगर कर सकता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार दवाइयों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय योग को दिनचर्या में शामिल करना अधिक लाभकारी साबित हो सकता है। नियमित योगाभ्यास से शरीर की मुद्रा में सुधार होता है, मांसपेशियों का तनाव कम होता है, रक्त संचार बेहतर बनता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इससे तनाव का स्तर घटता है और माइग्रेन की समस्या पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है। मंत्रालय ने माइग्रेन से राहत के लिए भुजंगासन, पवनमुक्तासन, मार्जरी आसन और ताड़ासन जैसे योगासनों के साथ भ्रामरी एवं शीतली प्राणायाम के अभ्यास की सलाह दी है। भुजंगासन रीढ़ और गर्दन को मजबूत बनाता है, जबकि पवनमुक्तासन पेट और कमर के तनाव को कम करने में मदद करता है। मार्जरी आसन गर्दन और पीठ की जकड़न दूर करता है तथा ताड़ासन शरीर की मुद्रा को बेहतर बनाता है। वहीं भ्रामरी प्राणायाम मानसिक तनाव कम कर सिरदर्द में राहत देता है और शीतली प्राणायाम शरीर को ठंडक पहुंचाकर गर्मी से जुड़े माइग्रेन ट्रिगर्स को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है। सुदामा/ईएमएस 11 जून 2026