नई दिल्ली,(ईएमएस)। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (स्रिपी) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने पहली बार 12 परमाणु वॉरहेड को ऑपरेशनल रूप से तैनात किया है, जो उसकी परमाणु नीति में बड़े बदलाव को दिखाता है। पहले भारत युद्धकालीन स्थिति में ही परमाणु वॉरहेड और मिसाइलों को जोड़ता था, लेकिन अब कुछ वॉरहेड मिसाइल साइलो और परमाणु पनडुब्बियों पर हमेशा तैयार रखे जाएंगे। इस कदम से भारत की परमाणु तैयारियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है और यह उसके परमाणु त्रय (हवाई, जमीन और समुद्री) को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। रिपोर्ट बताती है कि भारत अब मिसाइलों को कैनिस्टर में रखने और समुद्री प्रतिरोध गश्त जैसे उपाय कर रहा है, जिससे शांतिकाल में भी कुछ वॉरहेड लांचर से जुड़े रह सकते हैं। यह कदम सुरक्षा को लेकर भारत की बढ़ती चिंताओं का स्पष्ट संकेत देता है। भारत का परमाणु कार्यक्रम हमेशा से रक्षात्मक रहा है, जिसका उद्देश्य हमला करना नहीं, बल्कि दुश्मनों को रोकना है। भारत अपनी नो फर्स्ट यूज (पहले परमाणु हमला न करने) की नीति पर दृढ़ता से कायम है, जिसका अर्थ है कि उसके परमाणु हथियार केवल जवाबी कार्रवाई के लिए हैं। यदि कोई देश भारत या उसकी सेनाओं पर परमाणु हमला करता है, तभी इनका इस्तेमाल किया जाएगा। भारत अपना परमाणु शस्त्रागार सीमित लेकिन प्रभावी रखता है, जिसका मकसद केवल दुश्मनों को रोकना है, न कि हथियारों की होड़ में शामिल होना। स्रिपी के हालिया अनुमानों के अनुसार, भारत के पास करीब 190 परमाणु हथियार हैं, जो पिछले वर्ष से थोड़े अधिक हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हथियारों की निगरानी करने वाली प्रमुख संस्था स्रिपी की रिपोर्ट बताती है कि भारत इस बदलाव से अपनी सुरक्षा को और पुख्ता बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच, पाकिस्तान भी परमाणु हथियारों की दौड़ में शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पास अनुमानित रूप से 170 परमाणु हथियार हैं और वह नई हथियार प्रणालियों का विकास जारी रखे हुए है, जिससे उसके भंडार में आने वाले दशक में और वृद्धि होने की संभावना है। स्रिपी ने अपनी रिपोर्ट में पिछले वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच रहे असामान्य रूप से गंभीर सैन्य संकट का भी उल्लेख किया है। मई 2025 में दोनों देशों के बीच हुए संक्षिप्त सैन्य संघर्ष के दौरान, भारत ने पाकिस्तानी हवाई और मिसाइल ठिकानों पर हमले किए थे, जिनके परमाणु स्तर तक बढ़ने की आशंका भी थी, हालांकि दोनों पक्षों ने तनाव को बढ़ने से रोकने के प्रयास किए। रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2025 में 92.1 अरब अमेरिकी डॉलर के रक्षा व्यय के साथ दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश रहा है। आशीष/ईएमएस 11 जून 2026