- 10 साल के इतिहास में पहली बार 40 स्थायी न्यायाधीशों का आंकड़ा पार पटना, (ईएमएस)। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने पटना हाईकोर्ट के सात अधिवक्ताओं को उसी न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त किया है। इस संबंध में केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय ने बुधवार देर शाम आधिकारिक अधिसूचना जारी की। इन नियुक्तियों के साथ ही 110 वर्ष पुराने पटना हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। नए न्यायाधीशों के पदभार ग्रहण करने के बाद हाईकोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 43 हो जाएगी, जो इसके इतिहास में अब तक की सबसे अधिक संख्या होगी। - तीन अधिवक्ता बने स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किए गए सात अधिवक्ताओं में से रंजन कुमार झा, कुमार मनीष और राज कुमार को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। ये तीनों अपने सेवानिवृत्ति की आयु तक न्यायिक सेवाएं देंगे। - चार अधिवक्ता बने अतिरिक्त न्यायाधीश वहीं राणा विक्रम सिंह, विकास कुमार, गिरिजिश कुमार और आलोक कुमार को अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। इनका कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से दो वर्ष का होगा। - इतिहास में पहली बार 40 से अधिक स्थायी जज पटना हाईकोर्ट में स्वीकृत न्यायाधीशों की कुल संख्या 53 है, जिसमें 40 पद स्थायी न्यायाधीशों और 13 पद अतिरिक्त न्यायाधीशों के लिए निर्धारित हैं। अब तक हाईकोर्ट में स्थायी न्यायाधीशों की संख्या कभी 40 के आंकड़े को पार नहीं कर पाई थी। नई नियुक्तियों के बाद पहली बार यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल होने जा रही है, जो न्यायिक व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। - बढ़ेगी मामलों के निपटारे की गति कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। बिहार में बड़ी संख्या में लंबित मुकदमों को देखते हुए यह नियुक्तियां न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने और आम लोगों को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। - न्यायिक व्यवस्था को मिलेगा बल पटना हाईकोर्ट देश के प्रमुख उच्च न्यायालयों में से एक है और बिहार के लाखों लोगों की न्यायिक उम्मीदों का केंद्र है। ऐसे में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से अदालत की कार्यक्षमता बढ़ेगी तथा मामलों की सुनवाई और निस्तारण प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी। संतोष झा- ११ जून/२०२६/ईएमएस