राष्ट्रीय
11-Jun-2026
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- जेपी आंदोलन से जुड़कर लालू गए जेल, यहीं से चमकी राजनीति नई दिल्ली,(ईएमएस)। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने गुरुवार को 78वां जन्मदिन मनाया। राज्य की राजनीति हो या फिर केंद्र की, लालू यादव के बिना किसी भी समीकरण या गठबंधन का बनाना आसान नहीं होता है। हालांकि इस बात की जानकारी बहुत कम लोगों को है कि लालू यादव की राजनीति में शुरूआत इतनी साधारण थी कि उन्होंने शायद खुद भी कभी नहीं सोचा था कि वह एक दिन देश की राजनीति में इतनी अहम भूमिका निभाएंगे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के गोपालगंज जिले के फुलवरिया गांव में 11 जून 1948 को लालू प्रसाद यादव का जन्म हुआ था। उनका शुरूआती जीवन संघर्षों से भरा रहा। लालू की तमन्ना सिर्फ एक सरकारी नौकरी पाना था। छात्र राजनीति में सक्रिय होने के बाद भी उनको लगता था कि सियासत में उनका कोई भविष्य नहीं है। सियासी सफर शुरू होता, उससे पहले ही उनका मन कहीं और लगा रहता था। लालू यादव पुलिस में कांस्टेबल बनना चाहते हैं, जिससे जीवन ठीक-ठाक ढंग से चल सके। लालू यादव ने पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव बने। इस तरह से उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की पहली सीढ़ी पर कदम रखा, जिसके बाद साल 1973 में पटना यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष बने। इस दौरान जयप्रकाश नारायण ने आपातकाल के खिलाफ बिगूल फूंका। जेपी आंदोलन के साथ जुड़कर लालू यादव जेल गए औऱ यहीं से उनकी राजनीति चमकी। साल 1977 में उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और 29 साल की उम्र में सांसद बन गए। 1990 में देश में अयोध्या राम मंदिर का मुद्दा उठा था। उस दौरान बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा निकाली। जब आडवाणी रथयात्रा लेकर बिहार पहुंचे तो तब तक लालू यादव ने रथयात्रा रोकने की ठान ली। वहीं अक्टूबर को बिहार के समस्तीपुर में आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद देश की सियासत में खलबली मच गई। बीजेपी ने केंद्र की वीपी सरकार से समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई, लेकिन इसके बाद लालू यादव एक ताकतवर नेता के रूप में उभरे। मार्च 1990 में लालू यादव बिहार के सीएम बने। इस दौरान उन्होंने तीन अहम फैसले लिए थे। जिनमें उन्होंने ताड़ी की बिक्री पर लगे कर और उपकर को हटा दिया था। उन्होंने करीब 150 चरवाहा विद्यालय खुलवाए, जिसमें चरवाहे मवेशी को चराते समय पढ़ाई कर सकें। इसके अलावा उन्होंने खेतिहर मजदूरों का न्यूनतम पारिश्रमिक को 16.50 से बढ़ाकर 21.50 रुपए कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक लालू यादव पर चारा घोटाले का आरोप लगा और उनको 25 जुलाई 1997 में सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा। यह लालू यादव के लिए टर्निंग प्वाइंट था। इसके बाद राबड़ी देवी बिहार की अगली मुख्यमंत्री बनी जो लालू यादव की पत्नी हैं। वहीं 5 जुलाई 1997 को लालू यादव ने राष्ट्रीय जनता दल का गठन किया था। जब लालू यादव ने रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। तो उनके प्रबंधन का डंका देश-विदेश तक बजा। लालू यादव के प्रबंधन की तारीफ चारों ओर होने लगी। लोग लालू यादव के प्रबंधन के कौशल का लोहा मानने लगे। यही कारण है कि साल 2004 में उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद में स्टूडेंट्स को प्रबंधन का गुर सिखाया। सिराज/ईएमएस 11जून26