नई दिल्ली,(ईएमएस)। बिहार की राजनीति में इन दिनों नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को लेकर विपक्ष हमलावर है। स्लोगन भी दे दिया कि जिसे इंजीनियर कहा जाता था, वो 12वीं पास निकला। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव अपने छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे। कांग्रेस सत्ता के विरुद्ध बिगुल भी फूंका। सत्ता भी हासिल की। वे अपने पुत्र राजद के नायक तेजस्वी यादव की शिक्षा पर खुद को फोकस नहीं कर पाए। तेजस्वी ने नौवीं कक्षा तक पढ़े हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल, दिल्ली से हासिल की थी। यहां आकर उनकी दिशा बदली, क्रिकेट की ओर आकर्षित हुए पर मैट्रिक की परीक्षा भी पास नहीं कर सके। ये तब हुआ जब राजद सुप्रीमो लालू यादव खुद कानून और राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री तक की पढ़ाई की है। उनकी शुरुआती पढ़ाई अपने गांव गोपालगंज और पटना के सरकारी स्कूल से सातवीं तक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी के बीएन कॉलेज से बीए में स्नातक किया। पोस्ट-ग्रेजुएशन उन्होंने राजनीति विज्ञान में एमए और लॉ की डिग्री हासिल की है। विकास पुरुष, सुशासन बाबू और न जाने कितने उपमाओं के मालिक बिहार के नेता और पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। उन्होंने वर्ष 1972 में बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से अपनी इंजीनियरिंग पूरी की, लेकिन उनके पुत्र निशांत कुमार ने 12वीं की परीक्षा पास की। बीआईटी मेसरा में इंजीनियरिंग करने गए लेकिन अंतिम साल की पढ़ाई पूरी नहीं कर सके। वहीं दलितों की आवाज बन कर उभरे रामविलास पासवान ने भी अपनी शिक्षा पटना विश्वविद्यालय और कोसी कॉलेज से पूरी की थी। उन्होंने राजनीति में आने से पहले एमए और बैचलर ऑफ लॉ की डिग्री हासिल की थी लेकिन रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान ने अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग से की। इसके बाद उन्होंने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी (झांसी) के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक में दाखिला लिया था, लेकिन तीसरे सेमेस्टर में ही उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। एक वरिष्ठ पत्रकार मानते हैं कि इक्कीसवीं सदी के बड़े बिहारी नेताओं में तीन ऐसे नाम हैं, जिनमें दो तो मुख्यमंत्री रह चुके हैं। तीसरा नेता कभी मुख्यमंत्री तो नहीं रहा, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में अपनी विशिष्ट पहचान कायम की। ये भी कि तीनों नेताओं ने ठीक-ठाक पढ़ाई भी की। लालू प्रसाद यादव बिहार के सीएम के अलावा केंद्र की राजनीति में भी सक्रिय रहे लेकिन वे अपने बेटों को अपने बराबर भी शिक्षा दिलाने में नाकाम रहे। उनके बड़े बेटे तेज प्रताप किसी तरह कॉलेज तक पहुंचे। छोटे बेटे तेजस्वी स्कूल से बाहर नहीं जा सके। क्रिकेट की ओर तेजस्वी का रुझान था, लेकिन वहां भी वे अपनी जगह नहीं बना पाए। आखिरकार, लालू ने दोनों बेटों को राजनीति में उतार दिया। मुख्यमंत्री रह चुके नीतीश कुमार ने खुद इंजीनियरिंग की पढ़ाई तो पूरी कर ली, लेकिन बेटे निशांत ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी यानी वह 12वीं तक ही पढ़े हैं। राम विलास पासवान केंद्र में मंत्री बनते रहे, लेकिन बेटे चिराग भी कॉलेज का मुंह नहीं देख पाए। ये अलग बात है पिता के रसूख से तीनों नेताओं के बेटे अभी राजनीति में हैं। ऐसा होना कोई नई बात नहीं है। आमतौर पर बड़े लोगों की संतानें ऐसी ही होती है। उनकी कामयाबी किसी और तरह से पहचानी जाती है। सिराज/ईएमएस 12 जून 2026