पायलटों के संगठन ने उठाए गंभीर सवाल नई दिल्ली(ईएमएस)। ठीक एक साल पहले, 12 जून 2025 को गुजरात के अहमदाबाद में एयर इंडिया का विमान एआई171 एक भीषण हादसे का शिकार हो गया था। इस दर्दनाक क्रैश में एक यात्री को छोड़कर विमान में सवार सभी 241 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे में न केवल विमान के पायलट, क्रू मेंबर और यात्री मारे गए, बल्कि एक मेडिकल कॉलेज के कैंपस में विमान गिरने के कारण जमीन पर मौजूद कई अन्य लोग भी असमय काल के गाल में समा गए। आज इस भयावह हादसे को पूरा एक साल बीत चुका है, लेकिन हादसा क्यों और कैसे हुआ? तथा इसके लिए कौन जिम्मेदार था? जैसे बुनियादी और अहम सवालों के ठोस जवाब आज भी सामने नहीं आ सके हैं। इस बीच, फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलटों (एफआईबी) ने दुर्घटना की चल रही जांच पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए इसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पायलटों के इस शीर्ष संगठन ने विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की पारदर्शिता और जांच की तकनीकी दिशा पर उंगली उठाई है। संगठन का दावा है कि क्रैश होने से पहले विमान ने कई तकनीकी चेतावनियां जारी की थीं, जिन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। संगठन के प्रमुख कैप्टन सीएस रंधावा ने इस संबंध में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि बोइंग 787 विमान ने उड़ान भरने से पहले और यात्रा के दौरान कम से कम 10 इनक्रिप्टेड यानी कोड वर्ड में हेल्थ मॉनिटरिंग कोड भेजे थे। उन्होंने शुरुआती जांच पर कड़ा असंतोष व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि जांच अधिकारियों ने वास्तविक तकनीकी खराबी या इलेक्ट्रिक फेल्योर की संभावनाओं को खंगालने के बजाय, बहुत ही जल्दबाजी में पूरा ध्यान केवल पायलट की गलती साबित करने पर केंद्रित कर दिया। कैप्टन रंधावा ने दावा किया कि विमान के एयरक्राफ्ट कम्युनिकेशन एड्रेसिंग एंड रिपोर्टिंग सिस्टम द्वारा भेजे गए इन महत्वपूर्ण संदेशों को शुरुआती जांच रिपोर्ट से गायब कर दिया गया। ये विशेष कोड विमान के उड़ान भरने से महज 15 मिनट पहले और उड़ान के दौरान सिस्टम द्वारा भेजे गए थे। इन कोड संदेशों को केवल विमान निर्माता कंपनी बोइंग ही डिकोड कर सकती है, यहां तक कि एयरलाइन खुद भी इन्हें सीधे नहीं पढ़ सकती। यह अत्याधुनिक सिस्टम दोनों इंजनों की गति, तेल और हाइड्रोलिक प्रेशर सहित सैकड़ों तकनीकी मापदंडों की निगरानी कर रिपोर्ट भेजता है। संगठन ने उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की है कि इस बेहद संवेदनशील डेटा को तुरंत डिकोड कर सार्वजनिक किया जाए, ताकि हादसे की असली वजह सामने आ सके। जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए संगठन ने पूछा कि हादसे में चमत्कारिक रूप से जीवित बचे एकमात्र यात्री से पूरे 10 महीने तक कोई पूछताछ क्यों नहीं की गई? इसके साथ ही उन्होंने दिवंगत पायलट के 91 वर्षीय बुजुर्ग पिता को जांच के नाम पर प्रताड़ित किए जाने का भी आरोप लगाया। रंधावा के अनुसार, इस विमान में दिल्ली से अहमदाबाद आते समय ही तकनीकी खराबी की सूचना मिली थी, जहां इसकी स्टेबलाइजर से जुड़ी समस्या के कारण कुछ मोटर बदले गए थे और आनन-फानन में इसे दोबारा उड़ान की हरी झंडी दे दी गई थी। हादसे में बचे एकमात्र यात्री के बयान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि टेकऑफ और लैंडिंग के समय विमान की लाइटें लगातार टिमटिमा रही थीं, जो विमान में किसी बड़े इलेक्ट्रिक फेल्योर का स्पष्ट संकेत था, जिसकी गहन तकनीकी जांच होनी अनिवार्य है। वीरेंद्र/ईएमएस/12जून2026