शरद पवार की पार्टी से तीन विधायक हुए बागी मुंबई(ईएमएस)। महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने शरद पवार को अपनी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) का कांग्रेस में पूरी तरह से विलय करने का एक बड़ा प्रस्ताव दिया है। इस बड़े सियासी घटनाक्रम के बीच शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट में आंतरिक कलह और फूट भी खुलकर सामने आ गई है, जिसने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। एक तरफ जहां विलय की चर्चाएं गर्म हैं, वहीं दूसरी तरफ शरद पवार गुट के तीन विधायकों—उत्तमराव जानकर, अभिजीत पाटिल और नारायण पाटिल—ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण से मुलाकात की है। माना जा रहा है कि टिकट वितरण से नाराज ये तीनों विधायक जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। यह मुलाकात सोलापुर में महायुति के नेताओं की एक बैठक के दौरान हुई, जिसमें सांगोला से शेकप विधायक बाबासाहेब देशमुख भी उपस्थित थे। दरअसल, इस पूरी बगावत की मुख्य वजह सोलापुर विधानसभा सीट पर टिकट का बंटवारा है। यहां भाजपा के राजेंद्र राउत के सामने शरद पवार गुट ने वसंतराव देशमुख को अपना उम्मीदवार बनाया है। वसंतराव देशमुख को सांसद धैर्यशील मोहिते पाटिल का बेहद करीबी माना जाता है। ऐसे में इन तीन विधायकों की नाराजगी और भाजपा उम्मीदवार को समर्थन देने के संकेत मोहिते पाटिल के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माने जा रहे हैं। इन विधायकों ने उम्मीदवार चयन को लेकर पहले भी सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि तब तैयार हुई जब शिवसेना के उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने सुझाव दिया था कि जो पार्टियां कांग्रेस से अलग होकर बनी हैं, जैसे तृणमूल कांग्रेस और एनसीपी, उन्हें अब वापस कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए। संजय राउत का मानना है कि आज के दौर में क्षेत्रीय दलों को अपने-अपने राज्यों में अस्तित्व की लड़ाई लड़ने के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय मंच की जरूरत है और इसके लिए उन्हें कांग्रेस की मदद लेनी चाहिए। इस सुझाव पर प्रतिक्रिया देते हुए शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि संजय राउत उनके बड़े भाई जैसे हैं और उनका यह सुझाव स्वागत योग्य है, हालांकि भविष्य में क्या होगा यह समय तय करेगा। इसके साथ ही सुप्रिया सुले ने विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले शिवसेना तोड़ी गई, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस की बारी है, इसलिए वे इस संकट की घड़ी में उनके साथ खड़ी हैं। इस बीच, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने भी इस सुर में सुर मिलाया है। उन्होंने संजय राउत के बयान का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि बिखरे हुए दलों को देशहित में एक मंच पर आना चाहिए और राहुल गांधी को इंडिया गठबंधन का नेता स्वीकार कर लेना चाहिए। बहरहाल, विलय के इस बड़े प्रस्ताव और अपने ही विधायकों की बगावत ने शरद पवार गुट के सामने एक साथ दोहरी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/12जून2026