क्षेत्रीय
12-Jun-2026
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- नई फसल आने तक राहत नहीं, दूसरी सब्जियों के भी दाम बढ़ें भोपाल (ईएमएस)। भीषण गर्मी की मार के बाद अब टमाटर के लाल तेवर रुलाने वाले हैं। राजधानी भोपाल में टमाटर के दाम खुदरा में 80 रूपए प्रति किलो को पार कर गए हैं और आने वाले दिनों में इसके और महंगे होने के आसार हैं। इस भारी तेजी के पीछे मुख्य कारण मप्र का लोकल माल पूरी तरह खत्म होना, राजस्थान से आवक बंद होने की कगार पर पहुंचना और मंडी नाका टैक्स का बढऩा है। शहर की करोंद फल एवं सब्जी मंडी में टमाटर के भाव 800 से 1000 रुपए कैरेट तक पहुंच गए हैं। वर्तमान में भोपाल सहित पूरे एमपी में टमाटर की सप्लाई के लिए एकमात्र सहारा महाराष्ट्र बचा है। आने वाले तीन महीनों तक यह निर्भरता ऐसी ही रहेगी और गणेश चतुर्थी पर नई फसल आने के बाद ही कीमतों में कुछ राहत मिल पाएगी। महाराष्ट्र के नारायण गांव और कलवन का सुपर माल मंडी में 800 से 1000 रूपए प्रति कैरेट के करीब बिक रहा है। मंड़ी में थोक में इसका भाव 50 रूपए से 60 रूपए प्रति किलो है, जबकि मंडी के बाहर खुदरा (रिटेल) में यही टमाटर 70 से 80 रुपए किलो तक बिक रहा है। राजस्थान का माल मंडी में 400 रूपए प्रति कैरेट तक बिक रहा है। थोक में इसका भाव 30 से 40 रूपए प्रति किलो है, जबकि बाहर बाजार में यह 60 रूपए किलो तक बिक रहा है। इसलिए महंगा हुआ टमाटर प्रदेश में भीषण गर्मी और नई बोआई के चलते फसल का भारी शॉर्टेज हुआ है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में टमाटर खत्म हो चुके हैं और किसान नई फसल की तैयारी में जुट गए हैं। पूरे मप्र में सिर्फ हरदा बेल्ट में ही थोड़ा-बहुत माल बचा है। मंडी में राजस्थान के बड़ा नयागांव और कोटा से टमाटर आ रहा है, लेकिन वहां खराब मिट्टी और पानी की समस्या के चलते फसलें खराब होने की स्थिति में हैं। व्यापारियों के मुताबिक अगले 5 से 10 दिनों में राजस्थान का यह हल्का माल भी पूरी तरह खत्म हो जाएगा, जिससे आवक बंद हो जाएगी। प्रदेश में टमाटर की किल्लत के बीच गुजरात और दक्षिण भारत (साउथ) के राज्यों से भारी डिमांड आ गई है। बाहरी राज्यों में मांग अधिक होने के कारण मध्य प्रदेश की मंडियों में टमाटर के रेट अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गए हैं। मंडी नाका टैक्स बढऩे का भी असर टमाटर के दाम बढऩे में टैक्स का भी हाथ है। मंडी नाका पर लगने वाला टैक्स पहले 1 प्रतिशत था, जिसे अब बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया गया है। इस बढ़े हुए नाका रेट का सीधा असर सब्जियों की लागत पर पड़ रहा है। व्यापारियों और मंडी विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले दिन आम जनता की जेब पर और भारी पडऩे वाले हैं। जैसे ही मानसून या बारिश की शुरुआत होगी, परिवहन और माल खराब होने के चलते टमाटर के भाव और ज्यादा बढऩे की पूरी संभावना है। दूसरी सब्जियों के भी बढ़ें दाम टमाटर के साथ दूसरी सब्जियों की आवक भारी कमी दर्ज की गई है। आलम यह है कि जो सब्जियां कुछ दिन पहले तक 20 से 30 रुपए किलो मिल रही थीं, वे अब सीधे 40 से 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुकी हैं। व्यापारियों के मुताबिक, मालवा, निमाड़ सहित उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे उत्पादक क्षेत्रों में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण फसलें प्रभावित हुई हैं। इस वजह से हरी सब्जियों की सप्लाई चेन टूट गई है। मंडी में अब बड़ी गाडिय़ों की आवक कम हो गई है और सिर्फ छोटी पिकअप गाडिय़ां ही माल लेकर पहुंच रही हैं। व्यापारियों का साफ कहना है कि जब तक गर्मी का यह तीखा असर बना रहेगा, तब तक मंडियों में आवक कम और कीमतें ऊंची ही बनी रहेंगी। विनोद / 12 जून 26