- विशेष न्यायाधीश ने कहा- बेटियों के साथ अब बेटे भी असुरक्षित गुना (ईएमएस)। मासूम बच्चों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों पर कड़ा रुख अपनाते हुए गुना की पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत ने एक बेहद संवेदनशील मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। केंट थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक दस वर्षीय बालक को अपनी हवस का शिकार बनाने वाले संवेदनहीन दोषी को अदालत ने 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा से दंडित किया है। इस मामले में फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश सोनाली शर्मा ने समाज और व्यवस्था को झकझोरने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। न्यायालय ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के दौर में न केवल बेटियां, बल्कि बेटे भी पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सुरक्षा पाना हर एक बच्चे का बुनियादी संवैधानिक अधिकार है। बच्चों के प्रति बढ़ते इन घिनौने अपराधों को रोकने के लिए समाज के हर स्तर पर सक्रिय जागरूकता फैलाना बेहद अनिवार्य हो चुका है। हम सभी की यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि ऐसे घिनौने कृत्यों पर पूरी तरह रोक लगाएं और हर अपराधी को सख्त से सख्त कानूनी सबक सिखाएं। यह पूरा मामला वर्ष 2025 का है, जब 1 मार्च को पीडि़त मासूम बच्चे की मां ने जिला अस्पताल चौकी पहुंचकर इस बर्बरता की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने पुलिस को बताया था कि वह दोपहर के समय अपने घर में भोजन तैयार कर रही थी और उसका दस साल का बेटा घर के बाहर गलियारे में खेल रहा था। करीब आधे घंटे बाद जब महिला ने बाहर आकर देखा, तो उसका बच्चा वहां गायब था। बदहवास मां ने आसपास के पूरे मोहल्ले में अपने लाडले की तलाश की, लेकिन उसका कहीं कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे मासूम बच्चा रोते हुए अकेले घर वापस लौटा। मां ने जब बच्चे की हालत देखी, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्चे के मुंह और गले पर बेरहमी से मारपीट किए जाने के गहरे चोट के निशान साफ नजर आ रहे थे। डरे-सहमे बच्चे ने रोते हुए अपनी मां को आपबीती सुनाते हुए बताया कि पड़ोस के मकान में रहने वाला एक व्यक्ति उसके पास आया था। उसने बच्चे को कुत्ता छोडऩे चलने का झांसा दिया और बहला-फुसलाकर अपने साथ काली माता मंदिर के समीप स्थित सरसों के एक सूने खेत में ले गया। खेत के सन्नाटे का फायदा उठाकर आरोपी ने मासूम बच्चे के साथ जबरन अप्राकृतिक कृत्य करने का प्रयास किया। जब सहमे हुए बालक ने इसका कड़ा विरोध किया और शोर मचाने की कोशिश की, तो आरोपी ने दरिंदगी पर उतरकर मासूम को कई जोरदार चांटे मारे और उसका मुंह दबा दिया। मारपीट से भयभीत बच्चा जब पूरी तरह खामोश हो गया, तो आरोपी ने उसके साथ जबरन अप्राकृतिक कृत्य (कुकर्म) की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया और उसे वहीं तड़पता छोडक़र मौके से फरार हो गया। रोता-बिलखता मासूम किसी तरह अपने घर पहुंचा। केंट थाना पुलिस ने मां की शिकायत के आधार पर तत्काल तत्परता दिखाते हुए आरोपी के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में प्राथमिक दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया। तत्कालीन पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वारदात के महज तीन दिन भीतर 4 मार्च को आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उसे सीधे जेल भेज दिया गया। गहन पुलिस विवेचना के बाद न्यायालय में पुख्ता चालान पेश किया गया और मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपी की डीएनए रिपोर्ट भले ही नकारात्मक (नेगेटिव) प्राप्त हुई थी, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में मासूम बच्चे के निजी अंगों से भारी मात्रा में खून बहने और गंभीर अंदरूनी चोटों की पुष्टि पूरी तरह से उजागर हुई थी। इसी चिकित्सकीय साक्ष्य और पीडि़त बच्चे के बयानों को मुख्य आधार मानते हुए अदालत ने आरोपी को कड़ा सबक सिखाना न्यायोचित समझा। पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी नंदकिशोर उर्फ नंदू (30) पुत्र शोभाराम अहिरवार, निवासी अशोकनगर को इस जघन्य अपराध का मुख्य दोषी करार दिया। न्यायालय ने दोषी नंदकिशोर को 20 वर्ष के कड़े कारावास की सजा सुनाई और साथ ही उस पर 3500 रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया। इसके अलावा, अदालत ने पीड़ित मासूम बच्चे के पुनर्वास और मानसिक संबल के लिए उसे 4 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति मुआवजा राशि प्रदान करने के भी सख्त आदेश दिए हैं। शासन की ओर से इस पूरे मामले में सशक्त पैरवीकर्ता एडीपीओ ममता दीक्षित द्वारा की गई, जिन्होंने कोर्ट के सामने पीड़ित पक्ष का पक्ष पूरी मजबूती से रखा। - सीताराम नाटानी