अंतर्राष्ट्रीय
14-Jun-2026


- सिंधु जल समझौता रद्द होने का दिख रहा असर कराची,(ईएमएस)। पाकिस्तान इस समय एक बेहद गंभीर और ऐतिहासिक जल संकट के मुहाने पर खड़ा हो गया है। देश के सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में पानी की भारी किल्लत के कारण कृषि, आम जनजीवन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। सिंचाई नेटवर्क पर बढ़ते दबाव और प्रांतों के बीच पानी के असमान बंटवारे को लेकर उपजे विवाद ने इस पूरी स्थिति को और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया है। सिंचाई अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि पानी की इस भारी किल्लत के कारण लारकाना, शिकारपुर, कंबर-शहदादकोट और बलूचिस्तान के निचले इलाकों में मौसमी फसलों, विशेष रूप से चावल की खेती को भारी नुकसान पहुंच सकता है। सुक्कुर बैराज कंट्रोल रूम से मिले आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सिंध प्रांत को मिलने वाले पानी में इस समय 39.6 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। वर्तमान में सुक्कुर बैराज पर पानी की कुल आवक 50,620 क्यूसेक है, जबकि वहां से निकासी केवल 32,120 क्यूसेक ही हो पा रही है। सिंध की सात मुख्य नहरों के लिए कुल 53,200 क्यूसेक पानी आवंटित है, लेकिन इस समय उन्हें उनके कोटे से 21,080 क्यूसेक कम पानी मिल रहा है। अलग-अलग नहरों की स्थिति का जायजा लें तो दादू नहर का सबसे बुरा हाल है, जहां निर्धारित 5,997 क्यूसेक के मुकाबले सिर्फ 860 क्यूसेक पानी मिल रहा है—यानी सीधे तौर पर 85.7 प्रतिशत की भारी कमी देखी जा रही है। इसके अलावा खैरपुर फीडर वेस्ट में 67.1 प्रतिशत, कोट्री बैराज में 55.74 प्रतिशत, उत्तर-पश्चिम नहर में 50.7 प्रतिशत और राइस नहर में 39.1 प्रतिशत पानी की किल्लत बनी हुई है। इस बीच, सिंध के सिंचाई विभाग और किसान संगठनों ने ऊपरी हिस्से में स्थित पंजाब प्रांत पर अपने निर्धारित कोटे 44,000 क्यूसेक के मुकाबले 53,394 क्यूसेक पानी लेने का आरोप लगाया है, जो उनके तय अधिकार से 21.35 प्रतिशत अधिक है। फिर धान उत्पादन हो जाएगा खत्म इस जल संकट का सबसे घातक असर पाकिस्तान के बासमती चावल उद्योग पर पड़ने की आशंका है। लारकाना चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष खैर मोहम्मद शेख के अनुसार, यह संकट देश के सबसे प्रमुख कृषि क्षेत्रों में से एक को तबाह कर सकता है। अकेले लारकाना जिले में हर साल लगभग 2,42,000 मीट्रिक टन चावल का उत्पादन होता है और यह डिवीजन केवल चावल के निर्यात से देश को सालाना लगभग 90 अरब रुपये की विदेशी मुद्रा कमा कर देता है। इसके अलावा, सिंध की कुल 650 राइस मिलों में से लगभग 500 मिलें अकेले लारकाना क्षेत्र में ही स्थित हैं। पानी की अनुपलब्धता के कारण किसानों को खेतों को तैयार करने और बुवाई शुरू करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे आने वाले महीनों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगना तय माना जा रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस/14जून2026