अंतर्राष्ट्रीय
20-Apr-2023
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-यमन की राजधानी सना में हुआ हादसा, 300 से अधिक घायल, 13 की हालत गंभीर अदन(ईएमएस)। रमजान के दौरान जकात लेने की होड़ में 85 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है, वहीं 13 लोगों की हालत गंभीर है, जब‎कि तीन सौ से अ‎धिक लोगों के घायन होने की सूचना है। मामला यमन की राजधानी सना के एक स्कूल का है, जहां व्यापारियों द्वारा जकात बांटने का आयोजन ‎किया गया था। मीडिया में आई जानकारी के अनुसार यमन की राजधानी सना में मची भगदड़ में मरने वालों तथा घायलों की पु‎ष्टि की गई है। गौरतलब है ‎कि यमन में ईरान-समर्थित हूती आंदोलन चल रहा है। जहां सना में स्वास्थ्य निदेशक का हवाला देते हुए बताया कि मृतकों के अलावा कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें 13 की स्थिति काफी गंभीर है। हूती नियंत्रित आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान में बताया कि मुसलमानों के पवित्र महीने रमजान के अंतिम दिनों में व्यापारियों द्वारा जकात बांटने के दौरान भगदड़ मच गई। प्रवक्ता ने इस घटना को ‘दुखद’ बताया। गौरतलब है ‎कि जकात एक तरह का धर्मार्थ दान होता है। प्रत्येक सक्षम मुस्लिम के लिए हर साल अपनी कुल जमा संपत्ति में से ढाई फीसद हिस्सा बतौर जकात गरीबों में बांटना फर्ज होता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बचाव के प्रयास में शामिल दो चश्मदीदों के हवाले से बताया कि इस जकात के ‎लिए एक स्कूल में सैकड़ों लोग जमा हो गए थे। यहां हर व्यक्ति को 5,000 यमनी रियाल या भारतीय मुद्रा में कहें तो लगभग 1500 रुपये मिलने वाले थे। आंतरिक मंत्रालय ने एक अलग बयान में यह भी कहा कि जकात कार्यक्रम आयोजित करने के लिए जिम्मेदार दो व्यापारियों को हिरासत में लिया गया है और इस मामले की जांच चल रही है। ‎फिलहाल हूती नियंत्रित आंतरिक मंत्रालय ने मृतकों की सटीक संख्या नहीं दी, लेकिन एक हूती सुरक्षा अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मृतकों में कई महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सोशल मीडिया पर इस हादसे से जुड़े कई वीडियो भी डाले गए हैं, जिसमें एक बड़े परिसर के अंदर जमीन पर पड़ी लाशें देखी जा सकती है और आसपास एकत्र लोग चिल्ला रहे हैं। हालांकि इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं जा सकी है कि ये वीडियो इसी हादसे से जुड़े हैं। यमन में वर्ष 2014 में गृहयुद्ध छिड़ गया था, जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सना पर कब्जा कर लिया, जिससे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को समर्थन देने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। इस गृहयुद्ध के चलते वहां की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई और कई लोग भीषण आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।