वाशिंगटन (ईएमएस)। अंतरिक्ष में पुन: एक अनोखी घटना घटित होने वाली है, जो कि खगोलविदों के लिए किसी कौतूहल से कम नहीं है। करीब 1400 साल बाद आसमान में एक अनोखा मेहमान (धूमकेतु) जिसका नाम सी/2025 ए6 रखा गया है, एक बार फिर हमारी आंखों के सामने आने वाला है। इसे इस साल 3 जनवरी को अमेरिका के एरिजोना स्थित माउंट लेमन टेलिस्कोप से खोजा गया और तब से वैज्ञानिक लगातार इस पर नजर रखे हुए हैं। इसकी कक्षा (ऑर्बिट) बताती है कि यह हर 1396 साल में एक बार सूरज का चक्कर लगाता है। पिछली बार यह 629 ईस्वी में धरती के पास आया था और अब 21 अक्टूबर 2025 को सबसे करीब से गुजरेगा। अगली बार यह हमें वर्ष 3421 में दिखाई देगा। यानी अगर इस बार चूक गए, तो फिर इसे देखने के लिए कई जन्म भी कम पड़ जाएंगे। इस वक्त यह धूमकेतु मिथुन नक्षत्र में है और धरती से करीब 34 करोड़ किलोमीटर दूर है, लेकिन हर गुजरते दिन के साथ पास आता जा रहा है। 21 अक्टूबर को यह हमारे ग्रह के नजदीक होगा और 8 नवंबर को सूरज के बेहद पास से गुजरेगा। खास बात यह है कि यह शाम के वक्त पश्चिमी आसमान में नजर आएगा और धीरे-धीरे इसकी चमक और बढ़ती जाएगी। शुरुआत में इसकी रोशनी काफी कम थी, लेकिन हाल के दिनों में अचानक तेज हो गई है। यह मैग्नीट्यूड 16.5 से 11 तक पहुंच चुका है। खगोल विज्ञान में जितना छोटा अंक, उतनी ज्यादा चमक। जापान के मशहूर कॉमेट विशेषज्ञ सेइची योशिदा का अनुमान है कि यह मैग्नीट्यूड 4 या 5 तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में शहर की रोशनी से दूर, साफ और अंधेरी जगह पर इसे नंगी आंखों से भी देखा जा सकता है। हालांकि धूमकेतुओं की प्रकृति कुछ अनिश्चित होती है। कभी अचानक तेज चमक जाते हैं, तो कभी धुंधले पड़ जाते हैं या फिर अचानक विस्फोट करके और ज्यादा उज्ज्वल हो उठते हैं। यही कारण है कि खगोलविद इस धूमकेतु की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे हैं। यदि यह मैग्नीट्यूड 7.5 तक भी पहुंच गया, तो एक छोटे से टेलिस्कोप की मदद से भी लोग इस खगोलीय मेहमान की झलक पा सकेंगे। सुदामा/ईएमएस 30 अगस्त 2025