कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी पर मप एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई श्रीसन फार्मा के डायरेक्टर रंगनाथन गिरफ्तार -कफ सिरप से मासूमों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, जनहित याचिका पर आज होगी सुनवाई भोपाल/छिंदवाड़ा (ईएमएस)।मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत का कारण बने कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के डायरेक्टर गोविंदन रंगनाथन की गिरफ्तारी हो गई है। मामले में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई एसआईटी की टीम ने बुधवार रात चेन्नई में दबिश देकर रंगनाथन को पकड़ा। एसआईटी ने कंपनी से महत्वपूर्ण दस्तावेज, दवाओं के नमूने और प्रोडक्शन रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं। रंगनाथन पर 20 हजार रुपए का इनाम था। वह अपनी पत्नी के साथ फरार चल रहा था। चेन्नई में रंगनाथन का चेन्नई-बेंगलुरु राजमार्ग पर स्थित 2,000 वर्ग फुट का अपार्टमेंट सील कर दिया गया था, जबकि कोडम्बक्कम स्थित उसका रजिस्टर्ड ऑफिस बंद मिला था। छिंदवाड़ा एसपी अजय पांडे ने बताया कि एसआईटी, रंगनाथन को चेन्नई के सैदापेट में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया। उसकी ट्रांजिट रिमांड मांगी जाएगी। इसके बाद उसे छिंदवाड़ा लाया जाएगा। वहीं, मामले की जांच को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई कर सकता है। वकील विशाल तिवारी की याचिका में इस मामले की जांच राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या सीबीआई के जरिए विशेषज्ञों की समिति बनाकर कराए जाने की मांग की गई है। उधर, कफ सिरप पीने के बाद किडनी फेल होने से जान गंवाने वाले बच्चों की संख्या बढक़र 25 हो गई है। छिंदवाड़ा के मोरडोगरी परासिया निवासी गर्विक (1 वर्ष) पिता बाबू पवार की गुरुवार दोपहर नागपुर के मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई। तमिलनाडु सरकार सहयोग नहीं कर रही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरूवार को नागपुर पहुंचे। सीएम ने वहां के अस्पतालों में भर्ती चारों बच्चों का हाल जाना। उनके परिजन से बात की। इनमें से गार्विक पवार नागपुर मेडिकल कॉलेज में, अंबिका विश्वकर्मा न्यू हेल्थ सिटी हॉस्पिटल जबकि कुणाल यदुवंशी और हर्ष यदुवंशी नागपुर एम्स में इलाज करा रहे हैं। बच्चों से मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा- एमपी पुलिस ने तमिलनाडु में गिरफ्तारी की है, लेकिन तमिलनाडु सरकार हमारा सहयोग नहीं कर रही है। इसकी पूरी जिम्मेदारी दवा कंपनी की होती है। हमने भी ड्रग कंट्रोलर को हटाया, असिस्टेंट कंट्रोलर को सस्पेंड किया। सिरप लिखने वाले डॉक्टर पर कार्रवाई की। हमारी सरकार किसी छोडऩे वाली नहीं है सीएम डॉ. यादव ने कहा- मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कह सकते हैं कि मूल रूप से ट्रीटमेंट के दौरान दी गई दवाई की ही गलती है, जो मैन्युफैक्चरिंग मिस्टेक है। तमिलनाडु से रिपोर्ट आते ही हमने कंपनी को बैन किया, वहां से भी बैन हुआ है। हमारी सरकार किसी छोडऩे वाली नहीं है। सीएम ने इस मामले में कांग्रेस के रवैये को लेकर कहा कि जो बात कर रहे हैं, वे तमिलनाडु जाएं और धरना दें। फैक्ट्री को ड्रग लाइसेंस कैसे दिया। एक बार लाइसेंस दिया तो दोबारा कैसे रिन्यूअल कर दिया। छोटी सी जगह में इतनी बड़ी फैक्ट्री कैसे बना दी। राहुल भी जाना चाहें तो तमिलनाडु जाएं। केमिकल खरीदी का न बिल, न एंट्री इस बीच कोल्ड्रिफ सिरप की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। तमिलनाडु डायरेक्टर ऑफ ड्रग्स कंट्रोल की रिपोर्ट में सामने आया है कि यह सिरप नॉन फार्मास्यूटिकल ग्रेड केमिकल से तैयार किया गया था। जांच के दौरान कंपनी के मालिक ने मौखिक रूप से स्वीकार किया है कि उसने दो बार में प्रोपलीन ग्लायकॉल के 50 किलो के दो बैग खरीदे थे। यानी कंपनी ने 100 किलो जहरीला केमिकल खरीदा था। जांच में इसका न कोई बिल मिला है, न खरीद की एंट्री की गई। पूछताछ में जांच अधिकारियों को बताया गया कि भुगतान कभी कैश तो कभी गूगल पे से किया था। जहरीले केमिकल की मात्रा 486 गुना ज्यादा दवा बनाने वाली कंपनी ने घटिया क्वालिटी का प्रोपलीन ग्लायकॉल खरीदा। उसका कभी टेस्ट भी नहीं कराया। चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी के पास न तो खरीदी के बिल हैं और न ही प्रयोग किए गए केमिकल के रिकॉर्ड मौजूद हैं। लैब जांच में यह भी पाया गया कि सिरप में डाईएथिलीन ग्लायकॉल और एथिलीन ग्लायकॉल जैसे जहरीले रसायनों की मौजूदगी तय सीमा से 486 गुना अधिक थी। इधर, एक एक्सपर्ट ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया है कि यह मात्रा न सिर्फ बच्चों के लिए घातक है बल्कि यह हाथी के बराबर के जानवर की भी किडनी और ब्रेन को नष्ट कर सकती है। मार्च में खरीदा गया था केमिकल जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने चेन्नई की सनराइज बायोटेक से 25 मार्च 2025 को प्रोपलीन ग्लायकॉल खरीदा था। यह नॉन फार्मास्यूटिकल ग्रेड का था यानी दवा बनाने के लिए उपयुक्त नहीं था। इसके बावजूद कंपनी ने न तो इसकी शुद्धता जांची और न ही इसमें डाईएथिलीन ग्लायकॉल या एथिलीन ग्लायकॉल की मात्रा का परीक्षण किया। दस्तावेज छिपाने का किया प्रयास तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट ने पाया कि इस घटिया केमिकल से कई दवाएं तैयार की गईं। ऐसे में निरीक्षण के दौरान जांच टीम ने अपनी इन्वेस्टिगेशन को जारी रखा। जिसमें उन्होंने पाया कि कंपनी के पास उस समय प्रोपलीन ग्लायकॉल का कोई स्टॉक नहीं था। इससे शक और गहरा गया कि कंपनी ने केमिकल को तेजी से खत्म कर दस्तावेज छिपाने की कोशिश की। तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी ने कहा कि यह जांच सार्वजनिक सुरक्षा के हित में अत्यंत आवश्यक थी, क्योंकि नॉन फार्मास्यूटिकल ग्रेड केमिकल के इस्तेमाल से बनी दवाएं बच्चों और वयस्कों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। जनहित याचिका पर आज होगी सुनवाई मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट सहमत हो गया। अदालत ने दवा सुरक्षा तंत्र में जांच और व्यवस्थागत सुधार की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने का फैसला किया है। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने अधिवक्ता और याचिकाकर्ता विशाल तिवारी की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि यह मामला गंभीर है और तत्काल सुनवाई योग्य है। याचिका में इन घटनाओं की अदालत की निगरानी में जांच और एक सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति के गठन का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा, याचिका में कहा गया है कि जहरीली कफ सिरप से बच्चों की मौत से जुड़े सभी एफआईआर और जांचों को सीबीआई को ट्रांसफर किया जाए, ताकि पूरे देश में जांच एक समान और निष्पक्ष रूप से की जा सके।