-2 दिसंबर को अधिकांश आशंकाएं हो सकती हैं दूर नई दिल्ली,(ईएमएस)। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर चिंता गहराती जा रही है। हाल ही में जारी किए गए आयोग के टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस (टीओआर) में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं के गायब होने या अस्पष्ट रहने को लेकर कर्मचारी यूनियनें विरोध जता रही हैं। इनका कहना है कि वेतन संशोधन, पेंशन ढांचा, एनपीएस/ओपीएस से जुड़े प्रावधान, डीए एरियर, दया नियुक्ति और ट्रेड यूनियन अधिकार जैसे मुद्दों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश न होना सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है। इसे लेकर कर्मचारी यूनियनों ने सरकार को पत्र भी लिखे हैं। इसी बीच, 1 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर कर्मचारियों और पेंशनरों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। सत्र प्रारंभ होने से पहले राज्यसभा में सांसद जावेद अली खान और रामजी लाल सुमन ने सरकार से सीधा प्रश्न किया है कि क्या सचमुच 8वें वेतन आयोग के टीओआर से पेंशन संशोधन को हटा दिया गया है। पहले के सभी वेतन आयोगों में पेंशन संशोधन स्पष्ट रूप से शामिल रहता था, लेकिन इस बार इसका न होना बहस का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। पेंशनरों ने आशंका व्यक्त की है, कि कहीं इसे आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर करने पर विचार तो नहीं किया जा रहा है। सांसदों ने सरकार से यह भी पूछा है, कि पेंशन संशोधन को “प्रस्तावित नहीं” करने के पीछे क्या कारण हैं? कर्मचारी संगठनों का कहना है कि ऐसा कदम लाखों पेंशनभोगियों की आर्थिक स्थिरता को झटका दे सकता है। दूसरी ओर, महंगाई भत्ता (डीए) 50 फीसद पार कर चुका है और महंगाई दर भी ऊँची बनी हुई है। ऐसे में डीए-डीआर को बेसिक पे में मर्ज करने की मांग भी तेज हो गई है। यूनियनों का कहना है कि यह कदम कर्मचारियों और पेंशनरों को तुरंत राहत दे सकता है। बताया गया है कि वित्त मंत्रालय 2 दिसंबर को इन मुद्दों पर आधिकारिक जवाब देने वाला है, जिससे कई आशंकाओं पर से पर्दा उठने की संभावना है। 69 लाख पेंशनरों पर सीधा असर देश के लगभग 69 लाख पेंशनभोगी पेंशन संशोधन पर निर्भर रहते हैं, ताकि उनकी आय वर्तमान कर्मचारियों के अनुसार अद्यतन रह सके। यदि पेंशन संशोधन को वेतन आयोग के दायरे से बाहर किया गया, तो पुराने और नए पेंशनरों के बीच आय का फासला और बढ़ सकता है। यूनियनों ने टीओआर में शामिल अनफंडेड कॉस्ट ऑफ नन-कन्ट्रिब्यूट्री पेंशन स्कीम जैसी भाषा पर भी आपत्ति जताई है। उनके अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि सरकार सामाजिक सुरक्षा की जगह वित्तीय बोझ को प्राथमिकता दे रही है। कर्मचारी संगठनों ने दी चेतावनी कर्मचारी महासंघों ने चेतावनी दी है कि यदि 2 दिसंबर को आने वाला सरकारी जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। कुछ यूनियनें राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन की भी तैयारी में हैं। फिलहाल कर्मचारी और पेंशनभोगी दो प्रमुख सवालों के जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं, पहला क्या 8वें वेतन आयोग में पेंशन संशोधन शामिल रहेगा और दूसरा क्या डीए को बेसिक पे में जल्द मर्ज किया जाएगा। इन फैसलों का सीधा असर करोड़ों परिवारों पर पड़ने वाला है। हिदायत/ईएमएस 30नवंबर25