डॉ मंजू धर्मेन्द्र कटारे - श्रमदान सिर्फ काम नहीं, यह समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी का एक सुंदर संदेश है। पथरिया दमोह (ईएमएस)। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद जिला दमोह के मार्गदर्शन में नवांकुर संस्था नेहरू युवा नव जागृति नव युवक मंडल समिति बांसा कलां और ग्राम पंचायत बांसा कलां के संयुक्त तत्वावधान में जल संचय अभियान के अंतर्गत ग्राम बांसा कलां के गुलाबवारी सेर रतुआ नाला में श्रमदान कर 80 बोरी का बंधान किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से जिला पंचायत उपाध्यक्ष डॉ मंजू धर्मेन्द्र कटारे, ग्राम पंचायत बांसा कलां के सरपंच यतेन्द्र सिंह बांकड़ा, सचिव असगर खान, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य प्रशांत जैन, संस्था के अध्यक्ष घनश्याम पटेल, सेवक प्रजापति, धरातल जनकल्याण विकास समिति पथरिया से बसंत पटेल, जन अभियान परिषद के परामर्शदाता दिलीप कुमार पटेल, जीवन यादव, पुष्पा दुबे, दर्शिका तिवारी, अमरदीप जन जागरण विकास समिति से विजय तिवारी, संस्था साईबाबा महिला मंडल पथरिया से दीपा पचौरी, रूपेश सिंह बांकड़ा, रितिक सिंह बांकड़ा, मोहन पटेल, जीवल लाल पटेल, गोलू पटेल, मूरत सिंह ठाकुर, सहित बड़ी संख्या में सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की उपस्थिति में श्रमदान कर इस बोरी बंधान को सफल बनाया गया। मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई डॉ मंजू धर्मेन्द्र कटारे जी ने कहा कि श्रमदान सिर्फ काम नहीं, यह समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी का एक सुंदर संदेश है। बोरी बंधान के माध्यम से हम जल, जमीन और जीवन—तीनों की रक्षा करते हैं। जब हम अपने हाथों से बोरी बंधान करते हैं, तो प्रकृति को संजोने का संकल्प भी मजबूत करते हैं। यह छोटा प्रयास बड़े परिणाम देता है श्रमदान का एक-एक पल गांव के भविष्य को सुरक्षित बनाता है। बोरी बंधान जनभागीदारी का सबसे अच्छा उदाहरण है। सरपंच यतेन्द्र सिंह बांकड़ा जी ने कहा बोरी बंधान सिर्फ मिट्टी और पानी का काम नहीं, यह दिलों को जोड़ने और गांव को सशक्त बनाने का अभियान है। यदि हर व्यक्ति थोड़ा-सा श्रमदान करे, तो गांव की हर समस्या का समाधान संभव है। बोरी बंधान इसका ज्वलंत प्रमाण है। जल संरक्षण की दिशा में बोरी बंधान एक सरल, सस्ता और प्रभावी तरीका है। यह हमारे आज और आने वाले कल दोनों को सुरक्षित करता है। संस्था अध्यक्ष घनश्याम पटेल ने कहा कि आज रतुआ नाला में सभी की उपस्थिति में श्रमदान कर लगभग 80 बोरी का बंधन किया गया। श्रमदान में लगा पसीना गांव की खुशहाली का बीज बनता है। बोरी बंधान उसी खुशहाल भविष्य का निर्माण है। प्रकृति बचाने का रास्ता किसी बड़ी तकनीक से नहीं, बल्कि हमारे छोटे-छोटे श्रमदान से होकर जाता है। ईएमएस/मोहने/ 30 नवंबर 2025