- मार्कशीट के वेरिफिकेशन को लेकर भी उठे सवाल भोपाल(ईएमएस)। शिक्षा विभाग में फर्जी डीएड अंकसूची से नौकरी पाने के मामले में मप्र स्पेशल टॉस्क फोर्स (एमपी एसटीएफ) ने प्रदेश के कई जिलों में फर्जी डीएड सर्टिफिकेट से नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह मामला दर्ज होने के बाद आगे की जॉच में अब डीएड अंकसूची के सत्यापन को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल में लगभग सभी कार्य हाईटेक होने के बाद भी डीएड अंकसूची के सत्यापन को ऑफलाइन ही रखा है। बताया गया है की दसवीं-बारहवीं की मार्कशीट और आंसर शीट की चैकिंग तक का काम ऑनलाइन कर दिया गया है। वहीं परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने वाले हाईटेक माशिमं में सिर्फ डीएड की अंकसूचियों के सत्यापन का कार्य ऑफलाइन चल रहा है। सूत्रों के अनुसार इस संबध में एसटीएफ द्वारा विभाग से दस्तावेज मांगे गए हैं। और जिन जिलो के ऐसे अधिकारी जो वर्तमान में लोक शिक्षण में पदस्थ हैं, उनसे आगे की जॉच के दौरान पूछताछ की जा सकती है। गौरतलब है कि फर्जी डिग्री से सरकारी शिक्षक की नौकरी पाने के सबसे अधिक मामले मुरैना, शिवपुरी, ग्वालियर, इंदौर समेत अन्य जिलों में हैं। एसटीएफ जांच में सामने आया है की साल 1998 से 2006 तक जिला और जनपद पंचायत के माध्यम से डीएड की फर्जी अंकसूची का खेल चला है। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा संभाग या जिला स्तर पर बनाई नियोक्ता कमेटी द्वारा डीएड की फर्जी अंकसूची का सत्यापन कर मार्कशीट की रिपोर्ट को सही किया गया। ग्वालियर ईकाई एसपी, एसटीएफ अधिकारियो का कहना है कि फिलहाल माशिमं को लेकर किसी तरह की गड़बडी की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि इस मामले से संबंधित जिलों के कुछ अधिकारी वर्तमान में लोक शिक्षण में पदस्थ हैं। आग की जांच जारी है, और पड़ताल के दौरान आरोपियो की संख्या बढ़ सकती है। फिलहाल जॉच टीम यह पता लगा रही है की नौकरी पाने वाले उम्मीदवारो की फर्जी डिग्री का सत्यापन कर उसे सही बताने वाले आरोपी कौन है, और फर्जीवाड़े में जिसकी भी मिलीभगत सामने आयेगी उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। जुनेद / 30 नवंबर