:: जूनी इंदौर स्थित बड़ा रावला राजभवन में प्राचीन हथियारों और वाहनों की प्रदर्शनी, मालवी व्यंजनों ने जीता दिल :: इंदौर (ईएमएस)। दुनिया के 25 देशों से आए भारतीय मूल के लगभग 200 प्रवासियों ने जूनी इंदौर स्थित बड़ा रावला राजभवन में आयोजित एक विशेष प्रदर्शनी में लगभग 300 वर्ष पुरानी इंदौर रियासत की धरोहर को बड़े कौतूहल और रुचि के साथ देखा। इन मेहमानों ने हाथी पर शिकार के लिए बनाए गए होदा, शिकार के लिए इस्तेमाल होने वाले तीर-कमान, शेर के पंजे, गोसरू, कबर बिज्जू पकड़ने का पिंजरा, और रानी माँ गजरादेवी के लिए परदा लगी हुई शिकरम जैसी दुर्लभ वस्तुओं का अवलोकन किया। ग्लोबल इंडियन ऑर्गनाइजेशन (जीआईओ) के इंदौर चैप्टर के रीजनल प्रेसिडेंट युवराज वरदराज मंडलोई ने पिछले तीन दिनों से इंदौर आए इन प्रतिनिधियों को अपने राजमहल पर आमंत्रित किया था। :: शाही अंदाज़ में हुआ विदेशी मेहमानों का स्वागत :: सुबह करीब 10 बजे से ही प्रतिनिधियों का बड़ा रावला आगमन शुरू हो गया। उनके स्वागत में राजभवन के प्रवेश द्वार पर शहनाई वादन और नगाड़ों की मंगल ध्वनि के साथ छज्जे से गुलाब के फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा की गई। पंडितों ने वैदिक मंगलाचरण किया और प्रथम शासक मंडलोई परिवार की ओर से राव राजा श्रीकांत मंडलोई, रानी साहिबा माधवी मंडलोई जमींदार और परिवार के अन्य सदस्यों ने कुमकुम तिलक एवं पुष्प माला पहनाकर उनका आत्मीय स्वागत किया। प्रवेश द्वार के सामने बड़े हॉल में लगाई गई इस प्रदर्शनी में रियासतकालीन वस्तुओं के साथ-साथ कुछ विदेशी गाड़ियाँ और घोड़ागाड़ी भी प्रदर्शित की गईं, जिसने मेहमानों का ध्यान आकर्षित किया। :: मालवी जायके और निवेश का वादा :: प्रदर्शनी के बाद विदेशी मेहमानों को गार्डन थीम पर मालवा के परंपरागत व्यंजनों का शाही भोज परोसा गया। दाल-बाफले, कढ़ी-चावल, लड्डू से लेकर नाश्ते में पोहे-जलेबी और गराडू जैसे लोकप्रिय व्यंजनों का उन्होंने पूरे स्वाद और जायके के साथ आनंद लिया। इस अवसर पर मीडिया से चर्चा करते हुए जीआईओ के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजिन्द्र तिवारी ने इंदौर की मेहमाननवाजी और सुंदरता की खुले मन से तारीफ की। उन्होंने वादा किया कि वे अपने साथ आए मेहमानों को इंदौर में उद्योग एवं कारोबार स्थापित करने के लिए प्रेरित करेंगे। युवराज वरदराज मंडलोई, जो इंदौर चैप्टर के नवनियुक्त रीजनल प्रेसीडेंट हैं, ने आश्वासन दिया कि यदि विदेशी मेहमान इंदौर में उद्यम लगाते हैं तो वे और उनका परिवार अपनी 300 बरस पुरानी परंपरा का निर्वाह करते हुए हरसंभव सहयोग देंगे। उन्होंने याद दिलाया कि इंदौर वह शहर है जिसकी नींव उनके वंश के प्रथम शासक राव राजा नंदलाल मंडलोई ने सन 1716 में रखी थी और जिसकी हुंडी 300 बरस पहले ही चीन तक भरोसेमंद मानी जाती थी। कार्यक्रम के दौरान इंटरनेशनल विथ मेयर के करीब 50 छात्र-छात्राओं ने भी विदेशी मेहमानों से अपने भविष्य के बारे में मार्गदर्शन प्राप्त किया। राव राजा श्रीकांत मंडलोई ने सभी मेहमानों को प्रथम शासनकाल के लोगों से युक्त स्मृति चिन्ह भेंट कर उन्हें भावपूर्ण विदाई दी। इस अवसर पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी मनोज कुमार (आईएएस), अश्विन पलसीकर, प्रताप नायर, मनोहर देव और अन्य गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे। सभी विदेशी मेहमानों ने लगभग तीन घंटे तक पूरे बड़ा रावला राजमहल का अवलोकन किया। प्रकाश/30 नवम्बर 2025