- रसूखदारों पर गिरेगी गाज,विभाग में हड़कंप - जांच को भटकाने के लिए अहम दस्तावेज भी गायब कर दिए (जबलपुर) वीयू: घपले की जांच रिपोर्ट में सामने आए भोपाल के अधिकारियों के नाम (04पीआर07जीडब्ल्यू) जबलपुर(ईएमएस)। नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर में शोध के नाम पर हुए करोड़ों के घोटाले की आंच अब राजधानी भोपाल तक पहुँच गई है। अपर कलेक्टर रघुवीर सिंह मरावी की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कैंसर और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों पर रिसर्च के लिए आए सरकारी बजट को विश्वविद्यालय के जिम्मेदारों ने भोपाल में बैठे रसूखदार अफसरों के साथ मिलकर सैर-सपाटे में उड़ा दिया। सरकारी धन की इस होली में न केवल नियम ताक पर रखे गए, बल्कि जांच को भटकाने के लिए अहम दस्तावेज भी गायब कर दिए गए हैं। 3 करोड़ का बजट और गोवा का रिसर्च टूर...... जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011 से 2018 के बीच शासन ने विश्वविद्यालय को कैंसर और टीबी पर शोध के लिए 3 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की थी। इस राशि का उपयोग प्रयोगशालाओं और शोध कार्यों में होना था, लेकिन विश्वविद्यालय की टीम ने इस फंड से गोवा की लग्जरी ट्रिप प्लान की। बयानों में यह बात साफ हुई है कि शोध के बहाने अधिकारियों और कर्मचारियों ने सरकारी खर्च पर छुट्टियां मनाईं। हैरानी की बात यह है कि जब अपर कलेक्टर ने इन खर्चों का हिसाब मांगा, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। हालांकि, अब तक की जांच में करोड़ों के गबन की पुष्टि हो चुकी है और कई अधिकारी व कर्मचारी सीधे तौर पर दोषी पाए गए हैं। दस्तावेजों की हेराफेरी और भोपाल के अफसरों की भूमिका ........ इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू भोपाल का कनेक्शन है। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि इस घोटाले की फाइलें राजधानी में बैठे कुछ बड़े अफसरों की शह पर दबी रहीं। बयानों में खुले काले चिट्ठे ने यह साफ कर दिया है कि बंदरबांट का यह खेल बिना ऊंचे रसूख के मुमकिन नहीं था। शासन को अंधेरे में रखकर शोध कार्यों की फर्जी प्रोग्रेस रिपोर्ट भेजी जाती रही, जबकि जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। अपर कलेक्टर ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है, जिसके बाद अब विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक गई है। दोषियों पर एफआईआर दर्ज होने की भी संभावना जताई जा रही है। भ्रष्टाचार के इस मामले ने शिक्षा और शोध जगत को शर्मसार कर दिया है। अजय पाठक /शहबाज / 04 जनवरी 2026