वॉशिंगटन(ईएमएस)। इतिहास केवल युद्धों और राजनीतिक संधियों की गाथा नहीं है, बल्कि यह महान व्यक्तित्वों के विचित्र और रोचक किस्सों से भी भरा पड़ा है। ऐसा ही एक दिलचस्प वाकया दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे विंस्टन चर्चिल से जुड़ा है। चर्चिल को अपनी कूटनीतिक कुशलता के साथ-साथ शराब के प्रति उनके लगाव के लिए भी जाना जाता था। एक समय ऐसा आया जब उनके इस शौक के सामने अमेरिका का सख्त शराबबंदी कानून दीवार बनकर खड़ा हो गया, लेकिन चर्चिल ने अपनी चतुराई से उसका भी रास्ता निकाल लिया। बात वर्ष 1932 की है, जब अमेरिका में निषेध का दौर चल रहा था। 1920 से 1933 तक प्रभावी रहे इस कानून के तहत अमेरिका में शराब का उत्पादन, बिक्री और सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित था। इसे नोबल एक्सपेरिमेंट कहा जाता था। इसी दौरान चर्चिल को अमेरिका की यात्रा करनी थी। अब समस्या यह थी कि जो व्यक्ति दिन में कई बार जाम छलकाने का आदी हो, वह इतने सख्त कानून वाले देश में कैसे रहेगा? चर्चिल ने इसके लिए एक ऐसा कानूनी रास्ता खोजा जिसे सुनकर आज भी लोग हैरान रह जाते हैं। चर्चिल ने अपनी एक पुरानी दुर्घटना को अवसर में बदल दिया। अमेरिका यात्रा से कुछ समय पहले वे एक कार दुर्घटना में घायल हो गए थे। उन्होंने अपने डॉक्टर से एक विशेष मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन तैयार करवाया। उस ऐतिहासिक डॉक्टर की चिट्ठी में यह लिखा गया कि दुर्घटना के बाद चर्चिल के स्वास्थ्य में सुधार (रिकवरी) के लिए शराब का सेवन एक चिकित्सकीय आवश्यकता है। प्रिस्क्रिप्शन में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि चर्चिल को रोजाना कम से कम 250 क्यूबिक सेंटीमीटर (लगभग 8 औंस) स्पिरिट्स की आवश्यकता है। सबसे मजेदार बात यह थी कि इसकी कोई ऊपरी सीमा तय नहीं की गई थी; डॉक्टर ने इसे नेचुरली इंडेफिनिट यानी अनिश्चित रखा था। इसका सीधा मतलब था कि वे जितनी चाहें उतनी शराब कानूनी तौर पर पी सकते थे। आज यह दस्तावेज चर्चिल पेपर्स का हिस्सा है और इस पर चर्चिल ट्रस्ट की मुहर लगी है। हाल ही में जब इस पर्चे की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की गई, तो यह तेजी से वायरल हो गई। लोग चर्चिल की इस चालाकी और कानून के बीच से रास्ता निकालने की कला की जमकर सराहना कर रहे हैं। चर्चिल स्वयं भी अपनी इस आदत को लेकर काफी बेबाक थे, उनका एक प्रसिद्ध कथन है, मैंने शराब से उतना नहीं खोया, जितना शराब ने मुझे दिया है। यह किस्सा न केवल चर्चिल के व्यक्तित्व के एक अलग पहलू को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कानून की बंदिशें कभी-कभी रचनात्मक समाधानों को जन्म देती हैं। आज यह ऐतिहासिक चिट्ठी चर्चिल म्यूजियम की शोभा बढ़ा रही है। वीरेंद्र/ईएमएस 06 जनवरी 2026