रायपुर(ईएमएस)। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले को लेकर CBI की अंतिम चार्जशीट में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। राजधानी रायपुर से करीब 125 किलोमीटर दूर बारनवापारा के घने जंगलों में स्थित एक रिसॉर्ट को इस घोटाले का केंद्र बनाया गया था। यहीं पर चयनित अभ्यर्थियों को ठहराकर परीक्षा की विशेष तैयारी कराई गई और प्रश्नपत्र लीक कर चयन सूची तैयार करने की साजिश रची गई। CBI की चार्जशीट के मुताबिक, आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी ने कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर के साथ मिलकर इस पूरे षड्यंत्र को अंजाम दिया। मई 2022 के दौरान 11 से 24 मई के बीच 35 चयनित अभ्यर्थियों को बारनवापारा के एक रिसॉर्ट में ठहराया गया। ये सभी अभ्यर्थी कारोबारी, नेताओं और प्रभावशाली परिवारों से जुड़े बताए गए हैं। रिसॉर्ट में ठहराने की बुकिंग राहुल हरपाल के जरिए कराई गई थी। जांच में सामने आया है कि इन्हीं कमरों में अभ्यर्थियों को राज्य सेवा परीक्षा का असली प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया और वहीं बैठकर प्रश्न हल करवाए गए। आरोप है कि रिसॉर्ट के एक कमरे में ही प्रश्नपत्र लीक करने से लेकर चयन सूची तैयार करने तक की पूरी योजना बनाई गई। CBI के अनुसार, विकास चंद्राकर और उत्कर्ष चंद्राकर ने CGPSC मेंस परीक्षा का प्रश्नपत्र साल्वर को सौंपा था। चार्जशीट में यह भी खुलासा हुआ है कि विभिन्न पदों के लिए मोटी रकम तय थी। उदाहरण के तौर पर डिप्टी कलेक्टर पद के लिए एक करोड़ रुपये तक की डील की जाती थी। गौरतलब है कि CGPSC 2021 की मुख्य परीक्षा 26 से 29 जुलाई 2022 के बीच तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में आयोजित की गई थी। CBI का कहना है कि इस घोटाले में कई उच्च पदस्थ अधिकारी, नेता और प्रभावशाली लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हो सकते हैं। उनकी भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है। सत्यप्रकाश(ईएमएस)06 जनवरी 2026