राज्य
08-Jan-2026
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:: मातृभाषा उन्नयन संस्थान का ‘हस्ताक्षर बदलो अभियान’ बना आंदोलन :: इन्दौर (ईएमएस)। देश में हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने की दिशा में ‘हिन्दी में हस्ताक्षर बदलो अभियान’ ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा संचालित इस राष्ट्रव्यापी अभियान के माध्यम से अब तक 35 लाख से अधिक लोग देवनागरी लिपि में हस्ताक्षर करने का संकल्प ले चुके हैं। यह प्रयास हिन्दी के प्रति राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने की एक बड़ी कड़ी माना जा रहा है। संस्थान के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्पण जैन अविचल ने कहा कि हस्ताक्षर व्यक्ति की पहचान होते हैं। उन्होंने बताया कि अन्य लिपि में हस्ताक्षर करना मानसिक दासता का अवशेष है, जबकि देवनागरी में हस्ताक्षर करना भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान प्रकट करना है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य हिन्दी को राजभाषा से आगे ले जाकर राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करना है। :: 2017 से जारी है यह सफर :: वरिष्ठ भाषा आग्रही वेदप्रताप वैदिक के संरक्षण में यह अभियान वर्ष 2017 में आरंभ हुआ था। अब तक इस मुहिम से देशभर के 200 से अधिक महाविद्यालय और 20 से अधिक विश्वविद्यालय जुड़ चुके हैं। वर्तमान में लगभग 15 हजार ‘हिन्दीयोद्धा’ ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से जनजागरण का कार्य कर रहे हैं। :: उपलब्धियों का कीर्तिमान :: संस्थान ने वर्ष 2020 में 11 लाख हस्ताक्षर बदलने का विश्व कीर्तिमान भी बनाया था। संस्थान की विभिन्न राज्यों की इकाइयां स्कूलों, कॉलेजों और कार्यालयों में जाकर लोगों को अपनी मातृभाषा में हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। यह अभियान अब एक सामाजिक क्रांति का रूप ले चुका है, जिसमें हर वर्ग के लोग बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रहे हैं। प्रकाश/8 जनवरी 2026