लेख
09-Jan-2026
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विश्व एक व्यायामशाला है, जहां हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं। - स्वामी विवेकानंद जिस राष्ट्र में चरित्रशीलता नहीं है उसमें कोई योजना काम नहीं कर सकती। - विनोबा भावे ईएमएस / 09 जनवरी 26